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रुद्राक्ष क्यों पहनते हैं? क्या है रुद्राक्ष का रहस्य? रुद्राक्ष पहनने से पहले जान लें जरूरी बातें
Rudraksha Benefits: रुद्राक्ष को भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है इसलिए इसे बहुत पवित्र माना जाता है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए लोग इसे पहनते हैं।

जानें रुद्राक्ष से जुड़े रोचक फैक्ट्स...
Rudraksha Facts: हिंदू धर्म में भगवान शिव से संबंधित अनेक चीजें प्रचलित हैं, इनमें रुद्राक्ष भी शामिल है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो रुद्राक्ष एक विशेष प्रकार का बीज है, जो एलायोकार्पस गैनिट्रस (Elaeocarpus ganitrus) नाम के पेड़ से मिलता है। यह पेड़ नेपाल, भारत, इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। रुद्राक्ष को भगवान शिव से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि ये महादेव का आभूषण है।

रुद्राक्ष क्यों पहनते हैं?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष पहनना भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। कई लोग इसे पूजा, जप और ध्यान के दौरान पहनते हैं। इससे मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक साधना में एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसा भी कहते हैं कि रुद्राक्ष पहनने से ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड और दिल की बीमारी में आराम मिलता है।
रुद्राक्ष से दी मौत को मात
धर्म ग्रंथों के अनुसार किसी समय भद्रसेन नाम का एक राजा था। उसका एक ही पुत्र था। ज्योतिषियों ने बताया कि राजा को बताया कि उनके पुत्र की आयु बहुत कम है। उपाय पूछने पर उन्होंने राजा को बताया ‘आप अपने पुत्र को महादेव का प्रिय रुद्राक्ष धारण करवाएं। इससे इसकी मृत्यु का समय टल सकता है। राजा ने ऐसा ही किया। रुद्राक्ष के प्रभाव से राजा भद्रसेन के पुत्र को लंबी आयु मिली और वह भी अपने पिता की तरह ही चक्रवर्ती राजा बना।
रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व
पुराणों और शिव से जुड़ी परंपराओं के मुताबिक, रुद्राक्ष भगवान शिव के आंसुओं से पैदा हुआ। इसी कारण इसे पवित्र माना जाता है। कई श्रद्धालु पूजा-पाठ, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठानों में रुद्राक्ष की माला का प्रयोग करते हैं। शैव मत को मानने वाले रुद्राक्ष जरूर धारण करते हैं। मान्यता है कि मृत्यु के समय यदि रुद्राक्ष पहना हुआ हो तो मृतात्मा शिवलोक को जाती है।
कैसे करें असली-नकली रुद्राक्ष की पहचान?
1.असली रुद्राक्ष में मुख (प्राकृतिक रेखाएं) ऊपर से नीचे तक जाती हैं। अगर ये बीच में से टूटी हुई हो तो ये नकली हो सकता है।
2. असली रुद्राक्ष में बहुत अधिक चमक नहीं होती जबकि नकली रुद्राक्ष चमकदार और चिकना होता है।
3. अगर आप महंगा या दुर्लभ रुद्राक्ष खरीद रहे हैं, तो एक्स-रे टेस्ट से भी असली-नकली की पहचान की जा सकती है।
4. असली रुद्राक्ष कम वजन का होता है जो पानी पर तैरता है और नकली रुद्राक्ष भारी होता है जो पानी में डूब जाता है।
कितने प्रकार के होते हैं रुद्राक्ष?
रुद्राक्ष पर बनी रेखाओं को मुख या Mukhi कहते हैं। मार्केट में एक मुखी से लेकर कई मुखी तक के रुद्राक्ष मिलते हैं। हर मुखी रुद्राक्ष का अलग-अलग होता है। पंचमुखी (5 मुखी) रुद्राक्ष सबसे ज्यादा लोग पहनते हैं। शिव महापुराण में हर रुद्राक्ष का विशेष महत्व और मंत्र आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है।
क्या हर कोई रुद्राक्ष पहन सकता है?
ईश्वर में रखने वाला हर व्यक्ति रुद्राक्ष पहन सकता है लेकिन इसे पहनने के बाद अनेक नियमों का पालन करना पड़ता है। नहीं तो इसके बुरे परिणाम भी देखने को मिल सकते हैं। रुद्राक्ष पहनने के बाद मांस-मदिरा का सेवन न करें। महिलाएं अगर रुद्राक्ष पहनें तो मासिक धर्म के दौरान इसे निकाल दें। रुद्राक्ष पहनने वाले व्यक्ति को सात्विक जीवन जीना चाहिए।
रुद्राक्ष पहनने से पहले क्या करना चाहिए?
रुद्राक्ष पहनने से पहले इसे गंगाजल से धोकर शुद्ध कर लें। इसके बाद रुद्राक्ष की शिवलिंग के सामने रखकर पूजा करें। इसके बाद इसे श्रद्धापूर्वक धारण करें। धारण करते समय ऊं नम: शिवाय या ऊं रुद्राय नम: मंत्र का जाप करें तो और भी शुभ रहता है। अगर रुद्राक्ष किसी शुभ दिन जैसे सोमवार, महाशिवरात्रि पर पहना जाए तो ये और भी अधिक फलदाई माना जाता है।