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मंदिर में घंटी क्यों लगाते हैं, क्या इसे बजाना सभी के लिए जरूरी है? जानें धार्मिक और साइंटिफिक कारण
हर मंदिर में घंटी जरूर होती है। मंदिर में प्रवेश करते समय लगभग सभी भक्त ये घंटी बजाते हैं। घंटी मंदिर में क्या लगाते हैं, इसका हमारे मन पर क्या असर होता है? जानिए इन प्रश्नों के उत्तर।

जानें मंदिर की घंटी का महत्व
Temple Bell Significance: हिंदू धर्म में ऐसी अनेक परंपराएं हैं जो न सिर्फ धार्मिक बल्कि साइंटिफिक भी हैं। ऐसी ही एक परंपरा है मंदिर में घंटी बजाना। जैसे ही हम मंदिर में प्रवेश करते हैं तो प्रवेश दरवाजे या गर्भगृह के पास छोटी-बड़ी घंटी लगी होती है। अक्सर हम लोग भगवान के दर्शन से पहले या पूजा शुरू करने से पहले घंटी जरूर बजाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। मंदिर में घंटी क्यों लगाते हैं, इसके पीछे कईं दिलचस्प फैक्ट हैं।

धार्मिक मान्यता क्या कहती है?
हिंदू परंपरा के मुताबिक, मंदिर में घंटी बजाने से पूजा की शुरुआत का संकेत मिलता है। घंटी की आवाज से भक्तों का मन भगवान की ओर एकाग्र होता है और पूजा का माहौल बनता है। घंटी की आवाज शुभ मानी जाती है और यह पूजा के समय मन को सांसारिक चिंताओं से हटाकर भक्ति की ओर ले जाती है।
क्या घंटी बजाने का कोई साइंटिफिक वजह भी है?
घंटी बजाने को लेकर कई दावे किए जाते हैं, जैसे- इसकी आवाज से नेगेटिव एनर्जी खत्म होती है और बॉडी के सभी चक्र एक्टिव हो जाते हैं। हालांकि इसका कोई ठोस प्रमाण नहीं है। मनोविज्ञान के अनुसार, किसी साफ और क्लियर आवाज पर फोकस करने से हमारा ध्यान कुछ समय के लिए एक जगह टिक जाता है। मंदिर की घंटी की आवाज भक्तों का ध्यान पूजा की ओर केंद्रित करने में मदद करता है। इसे फोकस बढ़ाने वाला इंपेक्ट माना जा सकता है।
घंटी की आवाज का मन पर क्या असर होता है?
घंटी की आवाज लोगों को शांत और एकाग्र महसूस कराती है। यह असर इंसान की आस्था, माहौल और मेंटल कंडीशन पर भी डिपेंड करता है। इसी वजह से मंदिरों में शंख, घंटी और मंत्रोच्चार जैसी ध्वनियां पूजा का पार्ट होती हैं।
क्या हर मंदिर में घंटी होती है?
अधिकांश हिंदू मंदिरों में घंटी होती है, लेकिन उसकी बनावट, आकार और परंपरा अलग-अलग हो सकती है। कुछ मंदिरों में श्रद्धालु प्रवेश करते समय घंटी बजाते हैं, जबकि कुछ जगहों पर केवल पुजारी आरती या विशेष पूजा के समय घंटी बजाते हैं।
घंटी किस धातु की बनाई जाती है?
मंदिरों की घंटियां अक्सर तांबा, पीतल, कांसा, जस्ता और टिन जैसी धातुओं से बनाई जाती हैं। इन धातुओं से इसलिए बनाई जाती है ताकि घंटी से क्लियर, गूंजदार और लंबे समय तक रहने वाली आवाज निकले।
क्या घंटी बजाना जरूरी है?
धार्मिक दृष्टि से यह मंदिर की परंपरा और व्यक्तिगत आस्था का विषय है। किसी भी श्रद्धालु की भक्ति केवल घंटी बजाने या न बजाने से तय नहीं होती। पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा श्रद्धा, अनुशासन और पॉजिटिव भाव माना जाता है।
कॉन्टेन्ट सोर्सः Indira Gandhi National Centre for the Arts, Archaeological Survey of India, Encyclopaedia Britannica, National Mission for Manuscripts, Indian Council of Philosophical Research.