Why Wear Helmet: हेलमेट सिर्फ चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि आपकी जान बचाने का सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। जानिए हेलमेट पहनने के फायदे, सही हेलमेट चुनने के टिप्स और इससे जुड़े अहम फैक्ट।

Helmet Benefits: भारत में हर दिन हजारों लोग बाइक और स्कूटर से सफर करते हैं। कुछ लोग छोटी दूरी का बहाना बनाकर या जल्दबाजी में हेलमेट नहीं पहनते। उन्हें लगता है- "बस 2 मिनट का रास्ता है, क्या होगा?" लेकिन रोड एक्सीडेंट यह नहीं देखते कि आप कितनी दूर जा रहे हैं। रोड एक्सीडेंट में सबसे ज्यादा खतरा सिर (Head) को होता है। अगर सिर पर गंभीर चोट लग जाए, तो जान बचाना मुश्किल होता है। ऐसे में एक अच्छा हेलमेट आपकी जिंदगी और मौत के बीच सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बन सकता है।

हेलमेट क्या करता है?

हेलमेट का मेन काम एक्सीडेंट के समय सिर को चोट से बचाना है। जब बाइक या स्कूटर का एक्सीडेंट होता है, तो सिर सीधे सड़क, गाड़ी या किसी दूसरी चीज से टकरा सकता है। हेलमेट इस टक्कर के इंपैक्ट को काफी हद तक कम कर देता है। इससे सिर, खोपड़ी और ब्रेन को गंभीर चोट लगने का खतरा कम हो जाता है।

ये भी पढ़ें- सीट बेल्ट क्यों जरूरी है? घोड़ागाड़ी में लगने वाला सीट बेल्ट कार में कब आया?

हेलमेट पहनना क्यों जरूरी है?

1. सिर की गंभीर चोट से बचाता है

हमारा ब्रेन बॉडी का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। सिर पर तेज चोट लगने से इंसान की मौत या जिंदगीभर के लिए विकलांगता तक हो सकती है। हेलमेट इस खतरे को काफी कम करता है।

2. जान बचाने की संभावना बढ़ती है

हेलमेट पहनने से एक्सीडेंट के दौरान सिर की गंभीर चोट का जोखिम काफी कम हो जाता है। यही वजह है कि दुनिया के लगभग सभी देशों में दोपहिया गाड़ी चलाते समय हेलमेट पहनने पर जोर दिया जाता है।

3. कानून का पालन होता है

भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत ड्राइवर और पीछे बैठने वाले यात्री (कई राज्यों में लागू नियमों के अनुसार) के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य है। हेलमेट नहीं पहनने पर चालान और अन्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

4. धूल, बारिश और धूप से भी सुरक्षा

हेलमेट सिर्फ एक्सीडेंट में ही नहीं, बल्कि सफर के दौरान भी सुरक्षा देता है। जैसे-

  • धूल से बचाव
  • बारिश से राहत
  • तेज धूप से सुरक्षा
  • उड़ते हुए छोटे पत्थरों या कीड़ों से आंख और चेहरे की रक्षा

5. आत्मविश्वास के साथ सफर

जब आप सही तरीके से हेलमेट पहनते हैं, तो सफर ज्यादा सुरक्षित महसूस होता है। यह सुरक्षा की आदत को भी मजबूत बनाता है। सिर्फ हेलमेट पहनना काफी नहीं, सही हेलमेट चुनना भी जरूरी है। हेलमेट खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें...

  • BIS (ISI) सर्टिफाइड हेलमेट खरीदें।
  • हेलमेट का साइज आपके सिर के अनुसार सही होना चाहिए।
  • स्ट्रैप (पट्टा) हमेशा अच्छी तरह बांधें।
  • एक्सीडेंट में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हेलमेट दोबारा इस्तेमाल न करें।
  • बहुत पुराने या टूटे हुए हेलमेट चेंज कर दें।

ये भी पढ़ें- Insurance क्यों जरूरी है? Health से लेकर Life Insurance तक, जानें

आधा हेलमेट या बिना स्ट्रैप वाला हेलमेट क्यों खतरनाक है?

कुछ लोग हेलमेट तो पहनते हैं, लेकिन उसका स्ट्रैप नहीं बांधते। एक्सीडेंट के समय ऐसा हेलमेट सिर से निकल सकता है और सुरक्षा का मकसद पूरा नहीं कर पाता। इसी तरह, लो क्वालिटी वाले या नकली हेलमेट भी पूरी तरह सुरक्षा नहीं देते।

हेलमेट का निर्माण कब हुआ?

सिर की सुरक्षा के लिए धातु के हेलमेट हजारों साल से सैनिक पहनते थे। आधुनिक मोटरसाइकिल हेलमेट का डेवलमेंट 20वीं सदी की शुरुआत में हुआ। 1914 में ब्रिटिश डॉक्टर डॉ. एरिक गार्डनर ने मोटरसाइकिल रेसरों के लिए हेलमेट पहनने की सलाह दी। इसके बाद इंग्लैंड के एक बड़े मोटर रेसिंग इवेंट में पहली बार हेलमेट अनिवार्य किया गया। 1935 में मशहूर ब्रिटिश अधिकारी और मोटरसाइकिल प्रेमी टी.ई. लॉरेंस (Lawrence of Arabia) की सिर में गंभीर चोट लगने से मौत के बाद हेलमेट की जरूरत पर दुनिया का ध्यान गया। उनके इलाज करने वाले न्यूरोसर्जन सर ह्यू केर्न्स के रिसर्च में यह साबित हुआ कि हेलमेट से सिर की गंभीर चोटें काफी कम हो सकती हैं। इसी रिसर्च ने आधुनिक हेलमेट कानूनों की नींव रखी। सर ह्यू केर्न्स के रिसर्च के बाद Bell Helmets जैसी कंपनियों ने 1950–60 के दशक में फाइबरग्लास और आधुनिक सुरक्षा मानकों वाले हेलमेट डेवलप किए।

हेलमेट को लेकर कुछ जरूरी फैक्ट

  • 1961 में ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य ने दुनिया का पहला अनिवार्य मोटरसाइकिल हेलमेट कानून लागू किया।
  • हेलमेट पहनने से मोटरसाइकिल दुर्घटना में मौत का खतरा लगभग 22% से 42% तक कम हो सकता है।
  • सिर की गंभीर चोटों का खतरा 41% से 69% तक कम हो सकता है।
  • शुरुआती हेलमेट चमड़े (Leather) के बने होते थे, जबकि आज कार्बन फाइबर, फाइबरग्लास और पॉलीकार्बोनेट का इस्तेमाल होता है।

कॉटेंट सोर्सः WHO, भारत सरकार, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH), Bureau of Indian Standards (BIS), National Crime Records Bureau (NCRB), Global Road Safety Partnership (GRSP).