कुछ ऐसे अनाज हैं जिनका इस्तेमाल करना अब लोगों ने करीब-करीब छोड़ ही दिया है। ये अनाज बहुत फायदेमंद होते थे और इनके सेवन से कई बीमारियां अपने आप दूर रहती थीं। जौ ऐसा ही एक अनाज है। इसे कई इलाकों में जई और अंग्रेजी में बारले के नाम से जाना जाता है। 

हेल्थ डेस्क। कुछ ऐसे अनाज हैं जिनका इस्तेमाल करना अब लोगों ने करीब-करीब छोड़ ही दिया है। ये अनाज बहुत फायदेमंद होते थे और इनके सेवन से कई बीमारियां अपने आप दूर रहती थीं। जौ ऐसा ही एक अनाज है। इसे कई इलाकों में जई और अंग्रेजी में बारले के नाम से जाना जाता है। पहले छोटे बच्चों को जौ का पानी पीने के लिए दिया जाता था। बुखार लगने के बाद जौ का पानी जरूर पीने के लिए दिया जाता था, ताकि कमजोरी दूर हो सके। किसी का पेट खराब हो तो जौ का पानी पिलाने से आराम मिल जाता था। लेकिन अब तो यह अनाज ढूंढने पर ही मिलेगा। 

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पहले गेहूं में जौ का आटा मिला कर रोटी बनाई जाती थी और चने के सत्तू के साथ जौ का सत्तू भी मिलाया जाता था। यह उन अनाजों में है जो हजारों साल से पैदा हो रहे हैं और लोगों के मुख्य आहार में शामिल रहे हैं। जौ में फाइबर काफी मात्रा में पाया जाता है। इसमें फैट बहुत ही कम होता है और कैलोरी ज्यादा होती है। इसका पानी पीने से बॉडी का फैट कम होता है। जरूरी नहीं कि आप मोटापा कम करने के लिए कोई एक्सरसाइज करें, अगर आप रोज जौ का पानी ही पीते हैं, तो आपका वजन कम होने लगेगा। यह आजमाया हुआ एक सफल उपाय है, जैसा लोग अपने अनुभव के आधार पर बताते हैं। 

जौ का पानी बनाना बहुत आसान है। इसके लिए करीब डेढ़ लीटर पानी में थोड़ा जौ उबाल लें। जब यह पूरी तरह उबल जाए तो उसे छान लें। ध्यान रखें कि जब पानी करीब डेढ़ से दो गिलास बचे, तभी उसे आंच से उतारें। इसमें थोड़ा शहद और नींबू का रस मिला देने पर इसका स्वाद बढ़ जाता है। ऐसे भी पीने पर इससे काफी फायदा होता है। दिन में दो बार जौ का पानी पीना ठीक बताया गया है। ऐसे भी खाने में इस अनाज का इस्तेमाल करने से कई तरह की बीमारयां दूर रहती हैं। इसका सेवन करने से ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी बीमारी से बचाव होता है।