Pica Disorder in Children: बच्चे मिट्टी, चॉक या कागज क्यों खाने लगते हैं? क्या Pica Disorder आयरन की कमी का संकेत हो सकता है? Pica Disorder से बचाव के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए?

पेरेंट्स की नजर से छुप कर कई बार बच्चे दीवार की सीमेंट से लगाकर चॉक, कागज या मिट्टी तक खाने लगते हैं। अगर आपका बच्चा भी ऐसा कर रहे हैं, तो आपको सावधान हो जाने की जरूरत है। बच्चों के फेमस डॉक्टर इमरान पटेल ने बताया कि बच्चों में आयरन की कमी यानी पिका डिसऑर्डर (Pica Disorder in Children) के कारण यह समस्या देखने को मिलती है। पीका का एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें बच्चा ऐसी चीजें खाने लगता है, जो भोजन का अंग नहीं होती। बच्चों के साथ कभी-कभी गर्भवती महिलाओं और एनीमिया से पीड़ित लोगों में ऐसे लक्षण आमतौर पर देखने को मिलते हैं। आयरन की कमी के कारण बच्चे निम्नलिखित चीजें खाने लगते हैं।

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पिका डिसऑर्डर के कारण ये चीजें खाते हैं बच्चे

आयरन की कमी के कारण कुछ बच्चे बार-बार इन चीजों को खाने या चबाने की इच्छा दिखा सकते हैं।

  • मिट्टी
  • चॉक
  • दीवार का प्लास्टर
  • ईंट का चूरा
  • राख
  • कागज
  • साबुन
  • बर्फ (Ice craving)
  • बालू या रेत

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ऐसा क्यों होता है?

जब शरीर में आयरन की कमी होती है तो शरीर और मस्तिष्क के कार्य भी पूरी तरीके से प्रभावित हो जाते हैं। इस कारण से बच्चों में कुछ अलग खान की इच्छा पैदा हो जाती है। लेकिन आज तक इस स्थिति का कारण पूरी तरीके से स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आखिरकार बच्चे मिट्टी या सीमेंट जैसी चीज ही क्यों खाते हैं।

पिका डिसऑर्डर के कारण शरीर में एनीमिया के लक्षण भी दिखते हैं। अगर आपका बच्चा दीवार चटता है, मिट्टी खाता है या कागज का सेवन करता है, तो बिना देरी किए चाइल्ड स्पेशलिस्ट से मिलना चाहिए। ऐसे में डॉक्टर आमतौर पर आयरन की जांच करने की सलाह देते हैं।अगर आपके बच्चे में भी ऐसी समस्याएं दिख रही है तो आपको डाइट चेंज करने की जरूरत है।

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आयरन युक्त डाइट का करें चयन

डॉ. इमरान बताते हैं कि ऐसी कंडीशन में बच्चों को ऑयरन युक्त आहार देना चाहिए। आप बच्चे को विभिन्न प्रकार का भोजन खिला आयरन बढ़ा सकते हैं।

  • पालक और हरी पत्तेदार सब्जियां
  • चना और दालें
  • गुड़
  • अनार
  • किशमिश
  • खजूर
  • सोयाबीन
  • अंडे
  • मांस और मछली

यदि बच्चा लगातार ऐसी चीजें खा रहा है, तो उसे बच्चों की केवल गंदी आदत नहीं समझना चाहिए। यह सही पोषण न होने का संकेत होता है। तुरंत पहचान कर जल्द से जल्द बच्चे का ट्रीटमेंट कराएं।

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