आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu prasad yadav) कई सालों से किडनी के बीमारी से पीड़ित हैं। अब उनका किडनी ट्रांसप्लांट होने जा रहे हैं। लालू यादव के शरीर में उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ( Rohini Acharya) की किडनी लगाई जाएगी। एक बेटी पिता की जान बचाने के लिए आगे आई है। ऑर्गन डोनेशन की बात करें तो भारत में महिलाएं पुरुषों से आगे हैं जो अपनों की जान बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार होती हैं।

हेल्थ डेस्क. बिहार की राजनीति में काफी वक्त तक राज करने वाले लालू प्रसाद यादव ( (Lalu prasad yadav) लंबे वक्त से किडनी के बीमारी से पीड़ित है। अब उनकी बेटी रोहिणी आचार्य अपनी किडनी पिता को देने जा रही हैं। दोनों 20 से 24 नवंबर के बीच सिंगापुर जाएंगे, जहां रोहिणी अपनी किडनी को डोनेट करेंगी और पिता यानी लालू प्रसाद को लगाया जाएगा। रोहिणी ने कहा कि मैं अपने पिता के लिए कुछ भी कर सकती हूं, ये तो बस मांस का टुकड़ा है। वाकई भारतीय महिलाएं अपनों के लिए कुछ भी कर गुजरने के लिए तैयार रही है। बात ऑर्गेन डोनेशन की भी हो तो वो पुरुषों से आगे होती हैं।

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ऑर्गेन डोनेट कई लोगों को दे सकती है जिंदगी

घर में जब किसी सदस्य को ऑर्गेन की जरूरत पड़ती है तो मां-बेटी और बहन ही ज्यादातर आगे आती हैं। पुरुष इस मामले में पीछे हैं। जीवित इंसान अपनी एक किडनी, लिवर, फेफड़ा और आंतों का एक हिस्सा डोनेट कर सकता है। वो अपने परिवार और रिश्तेदार को ही अंगदान कर सकता है। लेकिन मरने के बाद इंसान के शरीर के 9 अंग किसी दूसरे की जिंदगी को बचा सकते हैं। डॉक्टर की मानें तो ब्रेन डेड के बाद इंसान के 25 अंग को डोनेट किया जा सकता है। जिसमें हार्ट, लंग्स आदी होते हैं। अंग दान कई लोगों को दूसरी जिंदगी दे सकता है। इसलिए इसे महादान कहा गया है। जिसमें महिलाएं आगे हैं।

महिलाएं अंगदान में सबसे आगे

रिपोर्ट् की मानें तो 70 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं अंगदान के लिए खुद आगे आती हैं। जबकि पुरुषों की संख्या 20 से 22 प्रतिशत है। वहीं पुरुषों को किडनी दान करने में 90 प्रतिशत महिलाएं आगे आती हैं। जबकि महज 10 प्रतिशत पुरुष ही ऐसा करते हैं। वो आज भी ऑर्गन डोनेट करने से कतराते हैं। ज्यादातर मां और पत्नी अपनों को आगे बचाने के लिए आगे आती हैं। मांए अपनी संतान को बचाने के लिए अपने अंग दान करने से पीछे नहीं हटती हैं।

ऑर्गेन ट्रांसप्लांट के लिए जरूरी चीजें
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए कई चीजों पर गौर करना पड़ता है। जैसे जो किडनी दे रहा है या फिर ले रहा है उसकी उम्र कितनी है। 
दूसरा बॉडी मास इंडेक्स
सीरम क्रिएटनिन और डायलिसिस की पॉजिटिव हिस्ट्री। 
इसके अलावा दोनों का जेंडर भी मैटर करता है।

जेंडर भी मैटर करता है

जर्नल ऑफ द अमेरिकन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, किडनी ट्रांसप्लांट का सक्सेज उम्र और जेंडर दोनों पर निर्भर करती है। 1.6 लाख लोगों की स्टडी में सामने आया है कि जिन महिलाओं का किडनी ट्रांसप्लांट होता है, उनकी किडनी फेल होने की आशंका ज्यादा होती है। इतना ही नहीं 45 के बाद अगर ट्रांसप्लांट किया जाता है तो इसका रेट और बढ़ जाता है। इसलिए उन्हें हमेशा डॉक्टर की निगरानी में रहने की जरूरत होती है। रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर पुरुष -पुरुष को ऑर्गेन डेट हैं तो इसका सक्सेज रेट ज्यादा होता है। लेकिन जब महिला पुरुष को ऑर्गेन डोनेट करती है तो कुछ वक्त बाद उसके फेल होने के चासेंज बढ़ जाते हैं।

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