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कौन हैं रवि केजरीवाल, जिनके ऊपर लग रहा है झारखंड सरकार गिराने का आरोप, कभी हेमंत सोरेन के थे राइट हैंड

सरकार गिराने की साजिश जिस रवि केजरीवाल पर लगा है, उनका झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन और हेमंत सोरेन से वर्षों का रिश्ता रहा है। उन्‍होंने पार्टी मे लंबे समय तक कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई है। हेमंत सोरेन की पहली 14 महीने की सरकार में सीएम के साथ साये की तरह रहते थे।

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Ranchi, First Published Oct 20, 2021, 2:22 PM IST
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रांची : झारखंड (jharkhand) में एक बार फिर हेमंत सोरेन (hemant soren) सरकार गिराने की खबर से सियासी हलचल तेज है। कुछ महीने पहले भी इसी तरह की चर्चा थी कि सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही है। सरकार गिराने के पुराने मामले में अब तक पुलिस जांच के नाम पर कुछ खास बात आगे बढी नहीं थी कि इस बीच एक बार फिर सरकार गिराने के आरोप में पुलिस ने एक और FIR दर्ज कर ली है। कौन हैं रवि केजरीवाल और क्यों लग रहा है उन पर आरोप आइए जानते हैं..

क्‍या है आरोप?
हेमंत सोरोने की सरकार गिराने का आरोप इस बार सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा के पुराने वफादार और लम्बे समय तक पार्टी के कोषाध्यक्ष रहे रवि केजरीवाल पर लगा है। रवि केजरीवाल पर आरोप है कि घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन को हेमंत सरकार से बगावत कर पार्टी तोड़ने के लिए उकसाया। इसके लिए केजरीवाल पर विधायक रामदास सोरेन ने नई सरकार में मंत्री पद और पैसे का प्रलोभन देने का आरोप लगाया है। विधायक रामदास सोरेन का कहना है कि केजरीवाल के साथ उनका एक दोस्त अशोक अग्रवाल ने प्रलोभन उनके सरकारी रांची निवास पर आकर दिया था। झामुमो विधायक ने रांची के धुर्वा थाने में इस बाबत अपनी शिकायत दी, जिसपर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।

कौन हैं रवि केजरीवाल?
सरकार गिराने की साजिश जिस रवि केजरीवाल पर लगा है, उनका झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन (Shibu Soren) और हेमंत सोरेन से वर्षों का रिश्ता रहा है। उन्‍होंने पार्टी मे लंबे समय तक कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई है। रवि केजरीवाल (ravi kejriwal) हेमंत सोरेन की पहली 14 महीने की सरकार में सीएम के साथ साये की तरह रहते थे। सरकार में रवि केजरीवाल की तूती बोला करती थी, लेकिन 2019 में जब झामुमो ने हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सरकार बनाई तो केजरीवाल हासिए पर चले गए। यहां तक की उनको पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया गया।

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रवि के चाचा प्रयाग थे शिबू के करीबी
18वीं शताब्दी में ही केजरीवाल परिवार बोकारो जिला के चास प्रखंड के कुर्रा गांव में बसा। रवि के बड़े चाचा प्रयाग केजरीवाल की वजह से ही रवि केजरीवाल के संबंध सोरेन परिवार से बने। प्रयाग केजरीवाल, शिबू सोरेन के काफी करीबी थे। बीजेपी जिस तरह फंड रेजिंग का आरोप कभी रवि केजरीवाल पर लगाया करती थी, उसी तरह के आरोप रवि केजरीवाल के चाचा प्रयाग केजरीवाल पर भी लगते थे। सोरेन परिवार से नजदीकियों की वजह से केजरीवाल परिवार की हालत सुधरी। तब रवि केजरीवाल के पिता ने बोकारो के सेक्टर-4 में रेमंड्स का शोरूम खोला। केजरीवाल परिवार उसी वक्त झारखंड में जमीन का कारोबार में भी उतरा। जरूरतमंदों को पैसा देकर उसकी जमीन अपने नाम करवाने का काम परिवार ने शुरू किया। इसी क्रम में केजरीवाल परिवार के करीबी मनोहर पाल, शिबू सोरेन के निजी सचिव बने। इनके निजी सचिव बनने के बाद कहा जाने लगा कि सोरेन परिवार राजनीति करती थी और बाकी का सारा काम प्रयाग केजरीवाल और मनोहर पाल के जिम्मे था। बाद में मनोहर पाल ने अपना कारोबार शुरू कर लिया। स्मृद्धि स्टील के मालिक बने। कुछ साल पहले करोड़ों की लागत से दिल्ली में एक फ्लाइंग क्लब खोला है।

विरासत के काम को रवि ने बढ़ाया
प्रयाग केजरीवाल और मनोहर पाल का काम रवि केजरीवाल ने संभाला। विरासत को आगे बढ़ाते हुए जब शिबू सोरेन के विकल्प के रूप में हेमंत सोरेन राजनीति में आए, तब रवि केजरीवाल एंड एसोसिएट्स ने हेमंत के काम का जिम्मा संभाला। हेमंत के राजनीति में आने के बाद रवि केजरीवाल पर ही फंड के जुगाड़ की सारी जिम्मेदारी आ गई। जिसे अंजाम देने में रवि केजरीवाल ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा। जमाना बदल चुका था। जमीन के काम से पैसों को खपाने का काम कारगर नहीं रह गया था। कॉरपोरेट कल्चर की शुरुआत हो चुकी थी। रवि केजरीवाल पर यह भी आरोप लगते रहे कि इन्होंने भी अपने काम का कल्चर बदला। मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका शेल कंपनी बना कर करने लगे।

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कोलकाता में शेल कंपनी खोलने का आरोप
शेल कंपनी खोल कर ब्लैक मनी को वाइट करने का एक नायाब तरीका चल पड़ा था। उस वक्त कलकत्ता और अभी के कोलकाता के महात्मा गांधी रोड और गणेश चंद्र एवेन्यू इन शेल कंपनियों का ठिकाना था। आज भी इन दोनों ठिकानों पर छोटे-छोटे पीओ बॉक्स नजर आ जाएंगे। इन्हीं पीओ बॉक्स के नंबर के आधार पर फर्जी कंपनियां बनाई जाती थी। सभी कंपनियों का पता पिन कोड नंबर 700001 से लेकर 700091 हुआ करता था। कहा जाए तो ये डब्बा ही कंपनी होती थी। जिसके जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का काम होता था। जब रवि केजरीवाल JMM के साथ थे तो बीजेपी हमेशा यह आरोप लगाते रही कि शेल कंपनी के काम में रवि केजरीवाल को महारथ हासिल है। अब उसी रवि केजरीवाल पर हेमंत सरकार को गिराने का आरोप लग रहे हैं।

क्या खतरे में है सोरेन सरकार?
81 विधानसभा सीटों वाली झारखंड विधानसभा में हेमंत सोरेन की सरकार के पास खुद की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा के 30 सदस्य के साथ कांग्रेस के 18 और राजद के 1 विधायक का समर्थन है। वहीं, अगर विपक्ष की बात करें तो मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के पास कुल 26 विधायक हैं और सहयोगी आजसू के पास 2 विधायक हैं। ऐसे में सरकार बनाने के लिए विपक्ष को 13 विधायकों की जरूरत पडेगी। आंकड़ों को देखें तो यह फिलहाल नामुमकिन सा दिखता है।

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