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20 साल बाद सावन में बनेगा हरियाली और सोमवती अमावस्या का योग, जानें इसका महत्व और उपाय

इस बार 20 जुलाई, सोमवार को श्रावण मास की अमावस्या है। इसे हरियाली अमावस्या कहते हैं। इस तिथि का हिंदू धर्म ग्रंथों में विशेष महत्व बताया गया है।

After 20 years Haryali and Somvati Amavasya will be on same day, know it's importance and remedies KPI
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Ujjain, First Published Jul 17, 2020, 12:27 PM IST
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उज्जैन. काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार इस बार 20 साल बाद सावन में हरियाली और सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है। इससे पहले 31 जुलाई 2000 में सोमवती और हरियाली अमावस्या एक साथ थी।

5 ग्रह होंगे स्वराशि में
- हरियाली अमावस्या पर 5 ग्रह (चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र और शनि) अपनी-अपनी राशियों में रहेंगे। 5 ग्रहों के स्वगृही होने से इस दिन किया गया स्नान और दान और भी पुण्य फलदायी रहेगा।
- इस पर्व पर किए गए श्राद्ध और तर्पण से पितर तृप्त होते हैं। भगवान शिव-पार्वती की पूजा भी इस दिन की जाती है। हरियाली अमावस्या पर खेती में काम आने वाले औजार हल, हंसिया आदि की पूजा करने की परंपरा है।
- नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, देव पूजा एवं पौधारोपण आदि शुभ काम करने से अक्षय फल प्राप्ति होती है।
- जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष, शनि की दशा और पितृ दोष है। उन्हें इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत अवश्य चढ़ाना चाहिए।
- हरियाली अमावस्या पर हर्षण योग और पुनर्वसु नक्षत्र का विशेष संयोग भी बन रहा है, जो शुभ फलदायी है।

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