उज्जैन. पुष्य को नत्रक्षों का राजा कहा जाता है। यह नक्षत्र सप्ताह के विभिन्न वारों के साथ मिलकर विशेष योग बनाता है। इन सभी का अपना एक विशेष महत्व होता है। ऋग्वेद में इस नक्षत्र को मंगलकर्ता, वृद्धिकर्ता, आनंद कर्ता एवं शुभ कहा गया है।

मंगल पुष्य पर करें मंगल यंत्र की स्थापना
जिन लोगों की कुंडली में मंगल अशुभ प्रभाव दे रहा है, वे यदि इस दिन मंगल यंत्र की स्थापना कर रोज इसकी पूजा करें तो इस दोष में कमी आ सकती है। इस यंत्र की अचल प्रतिष्ठा होती है यानी एक बार स्थापित करने के बाद इसका स्थान बदलना नहीं चाहिए।

मंगल यंत्र के लाभ
राजनीति, गृहस्थ जीवन, नौकरी पेशा आदि क्षेत्रों में परेशानी होने पर इस यंत्र की प्रतिष्ठा कर पूजा करने से सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। इस यंत्र के सामने सिद्धि विनायक मंत्र का नित्य जाप करने से सुख-समृद्धि प्राप्त होती है। मंगल यत्र की स्थापना के बाद प्रतिदिन इसके सामने बैठकर नीचे लिखे मंत्रों का जाप करना चाहिए। ये मंत्र इस प्रकार हैं-

- ओम् मंगलाय नम:
- ओम् भूमिपुत्राय नम:
- ओम् ऋणहन्त्रये नम:
- ओम् धनप्रदाय नम:
- ओम् स्थिरासनाय नम:
- महाकामाय नम:
- सर्वकाम विरोधकाय नम:
- लोहिताय नम:
- लोहितागाय नम:
- सांगली कृपाकराय नम:
- धरात्यजाय नम:
- कुजाय नम:
- भूमिदाय नम:
- भौमाय नम:
- धनप्रदाय नम:
- रक्ताय नम:
- सर्वरोग प्रहारिण्ये नम:
- सृष्टि कर्ते नम:
- वृष्टि कर्ते नम: