उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र का कहना है कि रोहिणी में इस बार 3 ग्रहों के वक्री और शुक्र तारा अस्त हो जाने से प्राकृतिक आपदाएं भी आ सकती हैं, जिससे महामारी, भीषण गर्मी, तेज हवा के साथ आंधी-तूफान, आगजनी, हवाई दुर्घटनाओं से जन-धन हानि होने की संभावना है। वहीं देश की राजनीति में उथल-पुथल हो सकती है।

ज्योतिष में नौतपा
ज्योतिषाचार्य पं. मिश्रा के अनुसार साल में एक बार ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आता है और 15 दिनों तक रहता है। इस दौर के शुरुआती 9 दिनों में जब चंद्रमा आर्द्रा से स्वाती तक 9 नक्षत्रों में रहता है। तब इन दिनों में तेज गर्मी पड़ती है। इसे ही नौतपा कहते हैं।

कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र के कारण पड़ती है तेज गर्मी
ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य अपनी शत्रु राशि यानी वृष में रहता है तो गर्मी तेज रहती है। इस दौरान सूर्य वृष राशि के 3 नक्षत्रों में 15-15 दिनों तक रहता है। ये नक्षत्र कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा है। खगोल शास्त्र के अनुसार वृषभ तारामण्डल में आने वाले ये यह नक्षत्र कृतिका, रोहिणी और मृगशिरा हैं। इनमें कृतिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य, रोहिणी का स्वामी चंद्रमा और मृगशिरा का स्वामी मंगल है। इन तीनों नक्षत्रों में सूर्य के आने से गर्मी बढ़ जाती है।
इन दिनों में रोहिणी नक्षत्र में आने से गर्म हवाएं और लू का असर और भी बढ़ जाता है। क्योंकि रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है और चंद्रमा से पृथ्वी को ठंडक मिलती है। लेकिन जब सूर्य इस नक्षत्र में आता है तो ठंडक की बजाय पृथ्वी का तापमान बढ़ा देता है। इसका कारण इन दिनों में गर्मी अधिक रहती है।

मानसून का गर्भकाल
ज्योतिष के सिद्धांत ग्रंथों के अनुसार नौतपा में अधिक गर्मी पड़ना अच्छी बारिश होने का संकेत माना जाता है। अगर नौतपा में गर्मी ठीक न पड़े, तो बारिश कम होने की संभावना रहती है। सूर्य की गर्मी और रोहिणी के जल तत्व के कारण नौतपा को मानसून का गर्भकाल माना जाता है।
ज्योतिष ग्रंथों में नवतपा के दौरान बारिश के लिए कहा गया है कि ज्येष्ठ महीने के शुक्लपक्ष में आर्द्रा से स्वाती तक दस नक्षत्रों में बारिश हो जाए तो वर्षा ऋतु में इन नक्षत्रों में बारिश नहीं होती, लेकिन इन्हीं नक्षत्रों में तेज गर्मी पड़े तो अच्छी बारिश होती है।