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विवाह के पहले मिलाते हैं लड़का-लड़की की जन्म कुंडली, कितने गुण मिलने पर सफल मानी जाती है शादी?

हिंदू धर्म में विवाह से पहले भी कई परपराएं निभाई जाती हैं। लड़का-लड़की कुंडली मिलाना भी इनमें से एक है। दोनों की कुंडली में कितने गुण मिल रहे हैं, उस के अनुसार, विवाह संबंध तय किया जाता है।

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Ujjain, First Published Jan 23, 2022, 3:58 PM IST

उज्जैन. वैवाहिक दृष्टि से कुंडली मिलान इन पांच महत्वपूर्ण आधार पर किया जाता है - कुंडली अध्ययन, भाव मिलान, अष्टकूट मिलान, मंगल दोष विचार, दशा विचार। उत्तर भारत में गुण मिलान के लिए अष्टकूट मिलान प्रचलित है जबकि दक्षिण भारत में दसकूट मिलान की विधि अपनाई जाती है। उपरोक्त पांच महत्वपूर्ण पहलुओं में से विचारणीय पहलू अष्टकूट मिलान के महत्वपूर्ण आठ कूटों का विचार होता है। अष्टकूट मिलान अर्थात आठ प्रकार से वर एवं कन्या का परस्पर मिलान को गुण मिलान के रूप में जाना जाता है। आगे जानिए क्या है ये अष्टकूट मिलान…

वर्ण - (1 अंक)
वर्ण का निर्धारण चन्द्र राशि से निर्धारण किया जाता है जिसमें कर्क, वृश्चिक, मीन राशियां विप्र या ब्राह्मण हैं। मेष, सिंह, धनु राशियां क्षत्रिय हैं। वृषभ, कन्या, मकर राशियां वैश्य हैं जबकि मिथुन, तुला और कुंभ राशियां शूद्र मानी गयी हैं।

वश्य- (2 अंक)
वश्य का संबंध मूल व्यक्तित्व से है। वश्य 5 प्रकार के होते हैं- द्विपाद, चतुष्पाद, कीट, वनचर, और जलचर। जिस प्रकार कोई वनचर जल में नहीं रह सकता, उसी प्रकार कोई जलचर जंतु कैसे वन में रह सकता है? द्विपदीय राशि के अंतर्गत मिथुन, कन्या, तुला और धनु राशि आती हैं। चतुष्पदी राशि के अंतर्गत मेष, वृषभ, मकर, जलचर राशि के अंतर्गत कर्क, मकर और मीन कीट राशि के अंतर्गत वृश्चिक राशि और वनचर राशि के अन्तर्गत सिंह राशि आती है। 

तारा (3 अंक) 
तारा का संबंध दोनों (वर-वधु ) के भाग्य से है। जन्म नक्षत्र से लेकर 27 नक्षत्रों को 9 भागों में बांटकर 9 तारा बनाए गए हैं- जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, वध, साधक, मित्र और अमित्र। वर के नक्षत्र से वधू और वधू के नक्षत्र से वर के नक्षत्र तक तारा गिनने पर विपत, प्रत्यरि और वध नहीं होना चाहिए, शेष तारे ठीक होते हैं। 

योनि (4 अंक)
जिस तरह कोई जलचर का संबंध वनचर से नहीं हो सकता, उसी तरह से ही संबंधों की जांच की जाती है। विभिन्न जीव-जंतुओं के आधार पर 13 योनियां नियुक्त की गई हैं- अश्व, गज, मेष, सर्प, श्वान, मार्जार, मूषक, महिष, व्याघ्र, मृग, वानर, नकुल और सिंह। जन्म नक्षत्र के आधार पर योनि निर्धारित होती हैं जिसका विवरण इस प्रकार से है- यदि योनियां एक ही है तो 4 अंक, यदि मित्र है तो 3 अंक, यदि सम है तो 2 अंक, शत्रु है तो 1 अंक और यदि अति शत्रु है तो कोई भी अंक नहीं दिया जाता है।  

ग्रह मैत्री (5 अंक)  
वर एवं कन्या के राशि स्वामी से ग्रह मैत्री देखी जाती है। राशि का संबंध व्यक्ति के स्वभाव से है। लड़के और लड़कियों की कुंडली में परस्पर राशियों के स्वामियों की मित्रता और प्रेमभाव को बढ़ाती है और जीवन को सुखमय और तनावरहित बनाती है। 

गण  (6 अंक)
गण 3 प्रकार के होते हैं- देव, राक्षस और मनुष्य। यदि वर-कन्या दोनों के गण एक ही हो तो पूर्णांक 6 अंक, वर देव गण हो कन्या नर गण की हो तो भी 6 अंक, यदि कन्या का देव गण हो वर का नर हो तो 5 अंक यदि वर राक्षस गण का हो कन्या देव गण की हो तो 1 अंक और अन्य परिस्थितियों में कोई अंक नहीं दिया जाता है।

भकूट (7 अंक)
वर और कन्या की चंद्र राशि के आधार पर भकूट देखा जाता है। वृष और मीन, कन्या और वृश्चिक, धनु और सिंह हो तो शून्य अंक,  तुला और तुला, कर्क और मकर, मिथुन और कुंभ हो तो सात अंक और समान राशि होने पर भी 7 अंक प्राप्त होंगे।  

नाड़ी ( 8 अंक)
जन्म नक्षत्र के आधार पर तीन प्रकार की नाड़ियां होती हैं आदि, मध्य और अंत्या। इस कूट मिलान मे वर -कन्या की एक नाड़ी नहीं होनी चाहिए, यदि दोनों की अलग-अलग नाड़ी हो तो पूर्णांक 8 अंक दिए जाते हैं जबकि अन्य स्थिति में ( जहां दोनों की एक ही नाड़ी होती है) कोई भी अंक नहीं दिया जाता है। जन्म राशि एक किन्तु नक्षत्र भिन्न अथवा नक्षत्र एक परन्तु राशि भिन्न अथवा चरण भिन्न होने पर दोष नहीं माना जाता है।

कितने गुण मिलने से विवाह माना जाता है उत्तम? 
कुंडली में ये सभी मिलकर  36 गुण होते हैं, जितने अधिक गुण लड़का लड़की के मिलते हैं, विवाह उतना ही सफल माना जाता है। 
18 से कम- विवाह योग्य नहीं अथवा असफल विवाह 
18 से 25- विवाह के लिए अच्छा मिलान 
25 से 32- विवाह के उत्तम मिलान, विवाह सफल होता है 
32 से 36- ये अतिउत्तम मिलान है, ये विवाह सफल रहता है

 

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