उज्जैन. हथेली में चतुष्कोण भाग्य का साथ दिलाने वाला निशान माना जाता है। हथेली में शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण से विपरीत फल मिल सकते हैं। शुक्र पर्वत पर चतुष्कोण अच्छा नहीं माना गया है।

चतुष्कोण (स्क्वेयर) की आकृति
चतुष्कोण चार भुजाओं वाली एक चौकोर आकृति होती है। चार रेखाओं से बनने वाली ये आकृति असमान, अलग-अलग लंबाई व चौड़ाई वाली हो सकती है। हथेली में रेखाएं और निशान बनते-बिगड़ते रहते हैं। अत: जब हथेली के शुभ स्थानों पर चतुष्कोण बनता है तो व्यक्ति को भाग्य की ओर से ज्यादा लाभ मिलने लगते हैं।

1. जीवन रेखा पर स्क्वेयर का फल
जीवन रेखा पर चतुष्कोण हो तो ये स्थिति उम्र को बढ़ाने वाली मानी गई है। जीवन रेखा टूट रही हो और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो यह शारीरिक परेशानियों को कम कर सकता है।

2. नीले, काले या लाल बिंदु के पास स्कवेयर
यदि हथेली पर कहीं नीले, काले या लाल बिंदु का निशान हो और उसके पास चतुष्कोण बन रहा हो तो दुर्घटनाओं से शरीर की सुरक्षा की ओर इशारा करता है।

3. विवाह रेखा पर स्क्वेयर
यदि विवाह रेखा सीधी न हो और नीचे की ओर झुक रही हो या आकार में गोल हो रही हो तो यह स्थिति जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं मानी गई है। विवाह रेखा में ये दोष हो और उस पर चतुष्कोण बन जाए तो जीवनसाथी से जुड़ी परेशानियों में राहत प्रदान करता है।

4. भाग्य रेखा पर स्क्वेयर
हथेली में भाग्य रेखा टूटी हो तो कार्यों में रुकावटें आती हैं। ऐसे में भाग्य रेखा के आस-पास ही चतुष्कोण बन जाए तो समस्याएं आती हैं, लेकिन वह सफलता भी मिल जाती है।

5. मस्तिष्क रेखा पर स्क्वेयर
मस्तिष्क रेखा अधिक लंबी हो तो मानसिक रूप से असंतोष उत्पन्न हो सकता है। यह स्थिति निराशा भी बढ़ा सकती है। यदि इस रेखा पर चतुष्कोण बन जाए तो व्यक्ति निराशा से बाहर आ सकता है। साथ ही मानसिक रूप से संतुष्टि भी मिलती है।

6. ह्रदय रेखा पर स्कवेयर
ह्रदय रेखा पर चतुष्कोण होने से व्यक्ति में मनोबल अधिक होता है। साथ ही ह्रदय रेखा की अशुभ स्थिति से ह्रदय संबंधी रोग हो सकते हैं।