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Aaj Ka Panchang 23 जून 2022 का पंचांग: गुरुवार को दिन भर रहेंगे 2 शुभ योग, जानिए राहुकाल का समय

23 जून 2022, दिन गुरुवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। इस दिन पहले रेवती नक्षत्र होने से मित्र और उसके बाद अश्विनी नक्षत्र होने से मानस नाम के 2 शुभ योग इस दिन बन रहे हैं। 
 

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Ujjain, First Published Jun 23, 2022, 5:30 AM IST

उज्जैन. पंचांग का उपयोग हमारे देश में प्राचीन काल से होता आ रहा है और आज भी हो रहा है। इसके अलावा नेपाल सहित कम्बोडिया, लाओस, थाईलैण्ड, बर्मा, श्रीलंका आदि में भी स्थानीय पंचांग का उपयोग किया जाता है। हिंदू पंचांग के अलावा, जैन, बौद्ध और सिक्खों का पंचांग भी होता है। भारत में विक्रम पंचांग सबसे ज्यादा प्रचलित है। इसके अलावा बंगाली, तमिल और मलयालम पंचांग भी प्रचलन में है। पंचांग से शुभ मुहूर्त, ग्रह-नक्षत्र परिवर्तन, दिशा शूल आदि बहुत सी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। पंचांग के 5 प्रमुख अंग बताए गए हैं- ये हैं करण, तिथि, नक्षत्र, वार और योग। आगे जानिए आज के पंचांग से जुड़ी खास बातें…

23 जून का पंचांग (Aaj Ka Panchang 23 June 2022)
23 जून 2022, दिन गुरुवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि रहेगी। इस दिन सूर्योदय रेवती नक्षत्र में होगा जो सुबह 10.12 तक रहेगा, इसके बाद अश्विनी आरंभ होगा, जो रात अंत तक रहेगा। गुरुवार को पहले रेवती नक्षत्र होने से मित्र और उसके बाद अश्विनी नक्षत्र होने से मानस नाम के 2 शुभ योग इस दिन बन रहे हैं। इस दिन राहुकाल दोपहर 02:09 से 03:50 तक रहेगा। इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें।   

ग्रहों की स्थिति कुछ इस प्रकार से होगी...
गुरुवार को चंद्रमा मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य मिथुन राशि में, बुध और शुक्र वृषभ राशि में, राहु मेष राशि में, केतु तुला राशि में, मंगल व गुरु मीन में और शनि कुंभ राशि में रहेंगे। गुरुवार को दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि करनी पड़े तो दही या जीरा मुंह में डाल कर निकलें।

23 जून के पंचांग से जुड़ी अन्य खास बातें
विक्रम संवत- 2079
मास पूर्णिमांत- आषाढ़
पक्ष- कृष्ण
दिन- गुरुवार
ऋतु- वर्षा
नक्षत्र- रेवती और अश्विनी
करण- वणिज और विष्टि
सूर्योदय - 5:46 AM
सूर्यास्त - 7:11 PM
चन्द्रोदय - 1:37 AM
चन्द्रास्त - 2:24 PM 
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12.02 से 12.55

23 जून का अशुभ समय (इस दौरान कोई भी शुभ काम न करें)
यम गण्ड - 5:46 AM – 7:26 AM
कुलिक - 9:07 AM – 10:48 AM
दुर्मुहूर्त - 10:14 AM – 11:08 AM और 03:36 PM – 04:30 PM
वर्ज्यम् - 03:45 AM – 05:29 AM

रेवती नक्षत्र के देवता हैं पूषा और स्वामी बुध
ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं, इनमें से रेवती अंतिम नक्षत्र है। इस नक्षत्र के देवता पूषा  हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने जीवन के 23वें वर्ष से 26वें  वर्ष तक काफी पॉजिटिव रहते हैं और इसके बाद इनका कुछ रुकावटों भरा होता है जो कि 42वें वर्ष तक रहता है। इस नक्षत्र में जन्में लोगों का कद माध्यम होता है। ये किसी की ज़रा सी विपरीत बात सहन नहीं कर पाते और आत्म नियंत्रण खो देते हैं। साहसिक कार्य करने की ललक सदा ही इनमें रहती है।
 

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