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कार्तिक मास 1 नवंबर से , ध्यान रखें ये 7 बातें, मिलेगा शुभ फल और पूरी हो सकती है हर मनोकामना

इस बार 1 नवंबर, रविवार से कार्तिक मास शुरू हो रहा है, जो 30 नवंबर, सोमवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों में इस मास का विशेष महत्व बताया गया है। कार्तिक मास में 7 नियम प्रधान माने गए हैं, जिन्हें करने से शुभ फल मिलते हैं और हर मनोकामना पूरी हो सकती है।

Kartik Mass from 1st November, Know the Dos and Don'ts of it KPI
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Ujjain, First Published Oct 31, 2020, 11:11 AM IST
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उज्जैन. इस बार 1 नवंबर, रविवार से कार्तिक मास शुरू हो रहा है, जो 30 नवंबर, सोमवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों में इस मास का विशेष महत्व बताया गया है। भगवान नारायण ने ब्रह्मा को, ब्रह्मा ने नारद को और नारद ने महाराज पृथु को कार्तिक मास के नियमों के बारे में बताया है। कार्तिक मास में 7 नियम प्रधान माने गए हैं, जिन्हें करने से शुभ फल मिलते हैं और हर मनोकामना पूरी हो सकती है। ये नियम इस प्रकार हैं...

1. दीपदान करना
कार्तिक मास में सबसे प्रमुख काम दीपदान बताया गया है। इस महीने में नदी, पोखर, तालाब आदि में दीपदान किया जाता है। इससे पुण्य की प्राप्ति होती है।

2. तुलसी पूजा
वैसे तो हर महीने तुलसी का सेवन व पूजा करना श्रेयस्कर होता है, लेकिन कार्तिक मास में तुलसी पूजा का महत्व कई गुना अधिक माना गया है।

3. जमीन पर सोना
भूमि पर सोना कार्तिक मास का तीसरा प्रमुख काम माना गया है। भूमि पर सोने से मन में सात्विकता का भाव आता है तथा अन्य विकार भी समाप्त हो जाते हैं।

4. न लगाएं तेल
कार्तिक महीने में केवल एक बार नरक चतुर्दशी के दिन ही शरीर पर तेल लगाना चाहिए। कार्तिक मास में अन्य दिनों में तेल लगाना वर्जित है।

5. द्विदलन निषेध
कार्तिक महीने में द्विदलन (फलीदार चीजें व दालें) अर्थात उड़द, मूंग, मसूर, चना, मटर, राई आदि नहीं खाना चाहिए।

6. ब्रह्मचर्य
कार्तिक मास में ब्रह्मचर्य का पालन जरूरी है। इसका पालन नहीं करने पर पति-पत्नी को दोष लगता है और इसके अशुभ फल भी प्राप्त होते हैं।

7. संयम रखें
व्रती (व्रत करने वाला) को चाहिए कि वह तपस्वियों के समान व्यवहार करें। अर्थात कम बोले, किसी की निंदा या विवाद न करे, मन पर संयम रखें आदि।

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