ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र बताए गए हैं। इन नक्षत्रों के आधार पर ही हिंदू पंचांग के महीनों के नाम निर्धारित किए गए हैं। 

उज्जैन. श्राद्ध पक्ष में भी इन नक्षत्रों का विशेष महत्व बताया गया है। महाभारत के अनुशासन पर्व में भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को बताया है कि किस नक्षत्र में श्राद्ध करने से उसका क्या फल मिलता है। इसकी जानकारी इस प्रकार है-

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1. जो मनुष्य कृत्तिका नक्षत्र में श्राद्ध करता है, उसे पुत्र की प्राप्ति होती है और उसके शोक-संताप दूर हो जाते हैं।
2. पुत्र की कामना वाले मनुष्य को रोहिणी नक्षत्र में और तेज की इच्छा रखने वाले को मृगशिरा नक्षत्र में श्राद्ध करना चाहिए।
3. आद्रा नक्षत्र में श्राद्ध करने वाले मनुष्य की क्रूर कर्म में प्रवृत्ति होती है। पुर्नवसु नक्षत्र में श्राद्ध करने से धन की इच्छा बढ़ती है।
4. जो अपने शरीर की पुष्टि चाहता है उसे पुष्य नक्षत्र में श्राद्ध करना चाहिए।
5. आश्लेषा नक्षत्र में श्राद्ध करने वालों को भाई-बंधुओं से सम्मान प्राप्त होता है। 
6. पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में श्राद्ध का दान करने से सौभाग्य की वृद्धि और उत्तराफाल्गुनी में करने से संतान की वृद्धि होती है।
7. चित्रा नक्षत्र में श्राद्ध करने वाले को रूपवान पुत्रों की प्राप्ति होती है।
8. स्वाती नक्षत्र में पितरों की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है।
9. विशाखा नक्षत्र में श्राद्ध करने से अनेक पुत्र प्राप्त होते हैं।
10. अनुराधा नक्षत्र में श्राद्ध करने वाला पुरूष राजाओं पर शासन करता है।
11. यदि कोई ज्येष्ठा में श्राद्ध करता है तो उसे ऐश्वर्य प्राप्त होता है।
12. मूल में श्राद्ध करने से आरोग्य और पूर्वाषाढ़ा में यश मिलता है।
13. उत्तराषाढ़ा में श्राद्ध करने से मनुष्य को किसी प्रकार का शोक नहीं होता।
14. अभिजीत नक्षत्र में श्राद्ध करने वाला वैद्य वैद्यकशास्त्र में सफलता प्राप्त करता है।
15. श्रवण नक्षत्र में श्राद्ध करने से सद्गति मिलती है। धनिष्ठा में श्राद्ध करने वाला राज्य का भागी होता है।
16. यदि वैद्य शतभिषा में श्राद्ध करे तो उसे कार्य में सफलता मिलती है।
17. पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र में श्राद्ध करने वाले को बहुत से बकरे और भेड़े मिलते हैं। 
18. उत्तराभाद्रपदा में श्राद्ध करने से गाएं प्राप्त होती हैं।
19. रेवती में श्राद्ध करने वाले को अनेक प्रकार की धातुओं का लाभ होता है।
20. अश्विनी नक्षत्र में श्राद्ध करने से घोड़े मिलते हैं और भरणी में श्राद्ध करने से उत्तम आयु प्राप्त होती है।
21. जो हस्त नक्षत्र में श्राद्ध करता है वह अभीष्ट फल का भागी होता है।