उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. प्रफुल्ल भट्‌ट के अनुसार, जन्म कुंडली में किस स्थान पर होता है सूर्य तो उसका क्या फल मिलता है-

1. कुंडली में सूर्य यदि शनि, राहु या केतु के साथ हो या दृष्टि संबंध बनाता हो तो व्यक्ति अपमान का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यदि सूर्य राहु या केतु के साथ स्थित है तो ग्रहण दोष बनता है।
2. सूर्य और शनि साथ हो तो पितृदोष का योगन बनता है। सूर्य और चंद्रमा साथ हो तो अमावस्या योग बनता है।
3. यदि कुंडली में सूर्य के ये अशुभ योग होंगे तो सरकारी नौकरी और ऊंचा पद पाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि इन दोषों को दूर करने के ज्योतिषीय उपाय किए जाए तो इनका अशुभ फल कम हो सकता है।
4. सूर्य मेष राशि में उच्च का और तुला राशि में नीच का प्रभाव देता है।
5. यदि कुंडली में सूर्य उच्च हो, मित्र लग्न की कुंडली हो, सूर्य पर शत्रु ग्रह की दृष्टि में न हो तो सूर्य की ये स्थिति व्यक्ति को सरकारी नौकरी, ऊंचा पद दिलवा सकती है।