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20 साल बाद नागपंचमी पर दुर्लभ योग, कालसर्प दोष की पूजा के लिए खास है ये दिन

सावन सोमवार और नागपंचमी के संयोग को संजीवनी महायोग कहा जाता है।

Rare yog on Nag Panchami after 20 years, it's a good day to perform kal sarp dosh puja
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Ujjain, First Published Aug 3, 2019, 12:54 PM IST
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उज्जैन. इस बार नागपंचमी (5 अगस्त) पर संजीवनी महायोग बन रहा है। ये योग 20 साल बाद बना है। उज्जैन की ज्योतिष अर्चना सरमंडल के अनुसार, सावन सोमवार और नागपंचमी के संयोग को संजीवनी महायोग कहा जाता है। इसके पहले 16 अगस्त 1993 को यह योग बना था। अगला योग 21 अगस्त 2023 को आएगा।

4 अगस्त की शाम से शुरू हो जाएगी पंचमी तिथि
सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी को नागदेव का पूजन करने की परंपरा है। पंचमी तिथि 4 अगस्त शाम 6.48 बजे शुरू होगी तथा 5 अगस्त दोपहर 2.52 बजे तक रहेगी। नाग पूजन का समय 5 अगस्त सुबह 6 से 7.37 तक और 9.15 से 10.53 तक रहेगा। नाग पंचमी पर सोमवार का संयोग अरिष्ट योग की शांति के लिए विशेष संयोग माना जाता है। इस दिन शिव का रुद्राभिषेक पूजन और कालसर्प दोष का पूजन का शुभ योग माना जाता है।

नाग की प्रतिमा का पूजन करें, जीवित का नहीं 
सपेरे द्वारा पकड़े गए नाग का पूजन करने से बचना चाहिए। नाग का पूजन सदैव नाग मंदिर में ही करना श्रेष्ठ रहता है। इस दिन कालसर्प दोष की पूजा का विशेष महत्व है। जन्म कुंडली में राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह आ जाने से ये कालसर्प दोष का योग बनता है। राहु और केतु को सर्प माना गया है, इसलिए नागपंचमी पर इस दोष के निवारण के पूजा करना श्रेष्ठ माना जाता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार ग्रहों के प्रतीक हैं सांप 
अनन्त नाग- सूर्य, वासुकि- सोम, तक्षक- मंगल, कर्कोटक- बुध, पद्म- गुरु, महापद्म- शुक्र, कुलिक एवं शंखपाल- शनैश्चर ग्रह के रूप हैं। आर्द्रा, अश्लेषा, मघा, भरणी, कृत्तिका, विशाखा, पूर्वा फाल्गुनी, पूर्वाभाद्रपद, पूर्वाषाढ़ा, मूल, स्वाति शतभिषा के अलावा अष्टमी, दशमी, चतुर्दशी अमावस्या तिथियों को सांप का काटना ठीक नही माना जाता। गरुड़ पुराण के अनुसार सांप के काटे से हुई मृत्यु से अधोगति की प्राप्ति होती है।

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