उज्जैन. ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्र के अनुसार हर साल, कुछ दिनों के लिए आकाश में ग्रह दिखाई नहीं देते हैं क्योंकि वे सूर्य के बहुत करीब आ जाते हैं। इसे ग्रह का अस्त या लोप होना भी कहा जाता है। 31 मई को शुक्र ग्रह वृष राशि में अस्त हो रहा है। इसके बाद 9 जून कि सुबह ये ग्रह उदय होगा। शुक्र अस्त होने के दौरान शुभ काम नहीं किए जाते हैं। बृहत्संहिता ग्रंथ के अनुसार शुक्र के अस्त होने से मौसम में अचानक बदलाव हो सकता है। नौतपा की तेज गर्मी के दौरान देश में कई जगह बारिश होने की भी संभावना बन रही है।

शुक्र अस्त और उदय का समय
31 मई से 8 जून तक सूर्य से शुक्र की दूरी 10 डिग्री से भी कम रहेगी। इसी स्थिति को शुक्र का अस्त होना कहा जाता है। अस्त होने पर शुक्र का प्रभाव कम हो जाएगा। इस साल शुक्र तारा 8 दिनों के लिए ही अस्त हो रहा है। यानी 9 जून को सुबह शुक्र ग्रह उदय हो जाएगा।

शुक्र ग्रह अस्त- 31 मई, रविवार को शाम करीब 7 बजकर 10 मिनट पर
शुक्र ग्रह उदय- 9 जून, मंगलवार को सुबह करीब 4 बजकर 40 मिनट पर

शुक्र के शुभ फल में आएगी कमी
31 मई को वृष राशि में शुक्र ग्रह के अस्त होने से इसका प्रभाव कम हो जाएगा और शुभ फलों में भी कमी आने लगेगी। शुक्र विलासिता का कारक ग्रह है। इसलिए इसके प्रभाव से सभी राशि वालों को हर तरह के सुख में कमी आ सकती है। शुक्र के कारण कई लोगों के वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार शुक्र अस्त होने के दौरान हर तरह के शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं। जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कामों की खरीदरी और अन्य संस्कार पूरे नहीं किए जा सकेंगे। इसके बाद 9 मई को शुक्र के उदय होने पर शुभ काम हो पाएंगे।

नहीं हो सकेंगे विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ काम
शुभ और मांगलिक मुहूर्त्त में गुरु और शुक्र का उदय रहना बहुत ही जरूरी होता है। इनके अस्त होने पर किसी भी प्रकार के शुभ और मांगलिक काम नहीं किए जा सकते हैं। 31 मई को पश्चिम दिशा में शुक के अस्त होने से विवाह, मुण्डन, सगाई, गृहारम्भ, गृहप्रवेश, सूरज पूजा, प्रॉपर्टी और अन्य मांगलिक कामों की खरीदारी नहीं की जा सकती है।