उज्जैन. गुण मिलान में अष्टकूट यानी वर्ण, वश्य,तारा,योनि,ग्रह मैत्री,गण,भकूट और नाड़ी का मिलान किया जाता है। इसमें सभी 8 श्रेणियों को 1 से 8 तक गुण दिए गए हैं। इनके आधार पर 36 गुण होते हैं। आम तौर पर 24 या उससे ज्यादा गुण मिलना शुभ माना जाता है। हालांकि सवाल उठता है कि क्या जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना, जिससे एक पूरी भावी पीढ़ी की नींव रखी जाती है, के लिए सिर्फ गुण मिलान ही पर्याप्त है? आगे पढ़िए विवाह से पहले संभावित वर और वधू की कुंडली में किन-किन बातों का विश्लेषण होना चाहिए-

मांगलिक दोष
इन 36 गुणों के अलावा कुंडली में मांगलिक दोष पर भी विचार किया जाता है। यूं तो कुंडली में मांगलिक दोष होना आम बात है, लेकिन कुछ भावों में मंगल की उपस्थिति के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। कुंडली में मांगलिक दोष निरस्त होने के कई योग हो सकते हैं।

लग्न, सूर्य और चंद्र
गुण मिलान के अलावा संभावित वर और वधू की कुंडलियों की लग्न भी देखी जाती हैं। परस्पर सामंजस्य के लिए उनके लग्नेश आपस में मित्र होने चाहिए, शत्रु नहीं। इसके अलावा अच्छे वैवाहिक जीवन के लिए सूर्य और चंद्र का विस्तार से विश्लेषण किया जाना चाहिए।

प्रथम भाव
यह भाव व्यक्ति के स्वभाव और व्यक्तित्व के बारे में बताता है। पहले भाव के अध्ययन से पता चलता है कि क्या लड़का और लड़की एक दूसरे के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएंगे।

दूसरा भाव
यह कुटुम्ब और वाणी का भाव है। यह आपको बताएगा कि व्यक्ति की बोली कैसी और घर में उसका व्यवहार कैसा होगा। यदि दोनों की बोली रूखी होगी, तो उनका जीवन कलह से भरा हो सकता है। ऐसे में यह अच्छी जोड़ी नहीं होगी।

चतुर्थ भाव
यह सुख और घरेलू संतोष का भाव है। किसी भी शादी की सफलता के लिए इस भाव से घरेलू माहौल का आकलन किया जाता है।

सातवां भाव
यह वैवाहिक सुख, जीवन साथी का भाव है। दोनों की कुंडली में यह भाव पीड़ित नहीं होना चाहिए। इससे उनका सुखद वैवाहिक जीवन सुनिश्चित होगा।

आठवां भाव
यह चरित्र और जीवन साथी की संपत्ति का भाव है। सुखद वैवाहिक जीवन के लिए अच्छे चरित्र का होना जरूरी है।

12वां भाव
यह खर्च का भाव है। यदि लड़का और लड़की दोनों को ज्यादा खर्च करने की आदत होगी तो मुश्किल वक्त के लिए उनके पास कोई पैसा नहीं बचेगा। ऐसे में कम से कम एक को बचत की आदत होनी चाहिए।