हाल ही में हुए एक रिसर्च में पता लगाया गया है कि किसी दिन को सबसे ज्यादा हार्ट अटैक आता है।विशेषज्ञों का मानना है कि इस रिसर्च से भविष्य में जीवन बचाने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कौन सा वो दिन हैं जो किलर डे साबित हो सकता है।

हेल्थ डेस्क. हार्ट अटैक की घटना बढ़ती ही जा रही हैं।विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक इस वजह से हर साल अनुमानित 17.9 मिलियन लोगों की जान जाती है। ऐसे में बेहद जरूरी है कि अपने दिल का खास ख्याल रखें, उसे लगातार मॉनिटर करते रहें। हाल ही में एक शोध में सामने आया है कि हार्ट अटैक के मामले सोमवार (Monday) को ज्यादा आते हैं। विशेषज्ञों ने इसके पीछे र्कैडियन स्लीप-वेक साइकिल में बदलाव को कारण बताया है। उनका कहना है कि कि घटना में और शोध भविष्य में जीवन बचाने में मदद करेगा।

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पांच सालों तक इसे लेकर हुआ शोध

वैज्ञानिकों ने 5 वर्षों में पूरे आयरलैंड में 10,000 से अधिक अस्पताल के रोगियों के डेटा का अध्ययन किया । उन्होंने सप्ताह में प्रत्येक दिन कितने दिल के दौरा पड़े इसकी गणना की।उन्होंने कार्य सप्ताह की शुरुआत और सबसे गंभीर प्रकार के दिल के दौरे के बीच मजबूत कनेक्शन पाया।एसटी-सेगमेंट एलिवेशन मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन (STEMI) दिल का दौरा पड़ने का सबसे गंभीर प्रकार है। सोमवार को सबसे ज्यादा एसटीईएमआई के लोग शिकार हुए। ये तब होता है जब एक प्रमुख कोरोनरी धमनी पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाती है। यह 11 प्रतिशत व्यस्कों की जान ले लेती है जो एक महीने के भीतर पीड़ित होते हैं।

अस्पताल में हार्ट अटैक से भर्ती हुए लोगों की गणना की गई

शोधकर्ताओं ने सप्ताह के प्रत्येक दिन के लिए दिल के दौरे के साथ अस्पताल में भर्ती होने वाले लोगों की संख्या की गणना की।बेलफास्ट हेल्थ एंड सोशल केयर ट्रस्ट के डॉ. जैक लाफान ने कहा कि वे इस लिंक को "ब्लू मंडे" (Blue Monday) कहते हैं। उन्होंने कहा कि वजह बहुत सारे फैक्टर से जुड़े होने की संभावना रखता है। हालांकि पिछले अध्ययनों से हम जानते हैं कि सकैंडियन एलिमेंट इससे जुड़ा है।

अधिक शोध की है जरूरत, बच सकती है मरीजों की जान

ब्रिटिश हार्ट फ़ाउंडेशन के प्रोफेसर सर नीलेश समानी ने और अधिक शोध करने के लिए कहा है।उन्होंने कहा, 'अब हमें सप्ताह के कुछ दिनों के बारे में क्या पता होना चाहिए, जिस दिन ज्यादा हार्ट अटैक आते हैं।ऐसा करने से डॉक्टरों को इस घातक स्थिति को बेहतर ढंग से समझने और अधिक जीवन बचाने में मदद मिल सकती है।'

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