Hunchback and Indian myths: कूबड़ एक मेडिकल कंडीशन है, जो उम्र, पोश्चर या हड्डी की कमजोरी के कारण हो सकती है। इसे लेकर कई मिथक हैं, लेकिन क्या वाकई ये अशुभ होता है? जानें कारण और उपाय।

Is hunchback inauspicious: हर इंसान के शरीर की बनावट अलग होती है, जिसके कारण उनका फिजिकल अपीरियंस भी एक दूसरे से अलग होता है। लेकिन कुछ लोगों के पीठ के ऊपरी हिस्से में जब हड्डी असमान रूप से बाहर की तरफ बढ़ने लगती है और शरीर का पोश्चर झुकने लगता है, तो उसे कूबड़ या Hunchback कहा जाता है। यह एक मेडिकल कंडीशन होती है, जो उम्र, पोश्चर या हड्डी की कमजोरी के कारण हो सकती है। लेकिन भारत देश में कूबड़ को लेकर कई सारे मिथक भी है, जिसमें कई लोगों का मानना है कि कूबड़ होना अशुभ संकेत देता है। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि यह कूबड़ होता क्यों है और क्या यह वाकई अशुभ होता है?

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कूबड़ होने के कारण (What causes hunchback)

  • कूबड़ कई तरह से हो सकता है। कई बार यह जन्मजात होता है।
  • घंटों बैठकर झुक कर काम करने से रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है और कूबड़ बन सकता है।
  • हड्डियों की कमजोरी या ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या में भी हड्डियां कमजोर होकर दब जाती है और कूबड़ आने लगता है।
  • रीढ़ की हड्डी में चोट या घाव के कारण भी कई बार कूबड़ बन सकता है।
  • विटामिन डी की कमी या रीढ़ की समस्या के कारण भी हड्डियों का ठीक तरीके से विकास नहीं होने के कारण बचपन में भी कूबड़ बन सकता है।
  • बुढ़ापे में कूबड़ होना आम बात है। उम्र बढ़ने से मांसपेशियों और हड्डियां कमजोर हो जाती है, जिससे शरीर झुकने लगता है।

क्या कूबड़ होता है अशुभ (Is kyphosis a bad sign)

समाज में शारीरिक दोष को लेकर कई सारी धार्मिक और ज्योतिष मान्यताएं प्रचलित है। कूबड़ को लेकर भी कुछ मान्यताएं हैं। सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि जिन लोगों की पीठ झुकी हुई होती है, उन्हें अपनी लाइफ में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई मान्यताओं के अनुसार, कूबड़ को पिछले जन्मों के कर्म का फल भी माना जाता है। वहीं, वास्तु और ज्योतिष में कूबड़ व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी और असंतुलन को दर्शाता है।

क्या है हकीकत (How to treat kyphosis naturally)

कूबड़ एक मेडिकल कंडीशन है, जिसे समय रहते रोका जा सकता है या इलाज किया जाता है। यह कोई अशुभ चीज नहीं है, ना ही किसी दुर्भाग्य का संकेत देती है। यदि सही तरीके से बैठने की आदत डाली जाए, कैल्शियम और विटामिन डी का सेवन किया जाए, योग जैसे भुजंगासन, ताड़ासन मार्जरीआसन किया जाए या डॉक्टर की सलाह पर फिजियोथेरेपी करवाई जाए, तो कूबड़ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।