बच्चों के सामने क्यों नहीं बदलना चाहिए कपड़ा, पैरेंटिंग कोच से जानें कारण
Parenting Tips:अक्सर माता-पिता कपड़े बदलते समय इस बात पर ध्यान नहीं देते कि बच्चे उन्हें देख रहे हैं। वे बेपरवाही से बच्चों के सामने ही ड्रेस चेंज कर लेते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं इसके पीछे की अहम वजहें।

माता-पिता की यह सोच कि बच्चा अभी छोटा है और उसे कुछ समझ नहीं आएगा, यहीं वो गलती कर बैठते हैं। पैरेंटिंग कोच डॉ अनुराधा बताती है कि ऐसी सोच बच्चों को गलत दिशा में लेकर चली जाती है। उनके मेंटल डेवलपमेंट पर भी असर डालती है।
बॉडी बाउंड्रीज की समझ
जब माता-पिता बच्चों के सामने कपड़े नहीं बदलते हैं, तो उन्हें यह मैसेज मिलता है कि शरीर के कुछ हिस्से प्राइवेट होते हैं और उन्हें दूसरे के सामने प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए। यह सीख उन्हें भविष्य अपनी और दूसरों की शरीर की सीमाओं को सम्मान करना सिखाती है।
बैड टच को पहचानने में मदद मिलती है
जब बच्चे को सिखाया जाता है कि शरीर निजी है और कपड़े बदलना एक निजी प्रक्रिया है, तो वह गुड और बैड टच के बीच का फर्क सही तरीके से समझ पाते हैं।
संस्कार और शर्म का बैलेंस
भारतीय संस्कृति में शरीर को ढकना और मर्यादा बनाए रखना संस्कारों का हिस्सा है। बच्चों के सामने कपड़े न बदलना उन्हें लज्जा, सम्मान और अनुशासन जैसे गुण सिखाता है, बिना किसी डर या दबाव के।
भविष्य में कन्फ्यूजन से बचाव
कई बार बड़े होकर बच्चे सवाल पूछते हैं या असहज महसूस करते हैं, क्योंकि उन्होंने बचपन में ऐसी चीजें देखी होती हैं जिनकी उन्हें उस समय समझ नहीं थी। सही आदतें भविष्य की उलझनों से बचाती हैं।
बच्चे के सामने कपड़े बदलना कब तक ठीक है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि 2-3 साल की उम्र के बाद बच्चों के सामने कपड़े बदलने से बचना चाहिए। इसी उम्र से बच्चों को धीरे-धीरे प्राइवेसी का मतलब समझाया जा सकता है। डॉ अनुराधा का वीडियो देखने के लिए लिंक पर क्लिक करें।
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