Golden Temple Significance: जानें अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की निर्माण कहानी, जिसे गुरु रामदास और गुरु अर्जन देव ने स्थापित किया। महाराजा रणजीत सिंह ने इसे स्वर्ण रूप दिया। यह स्थल समानता, सेवा और आस्था का प्रतीक है।

Amritsar Golden Temple facts: पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर, जिसे हरमंदिर साहिब भी कहा जाता है, सिख धर्म का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक स्थान नहीं, बल्कि समानता, सेवा और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु यहां माथा टेकने आते हैं। इसकी निर्माण कहानी भी उतनी ही खास और प्रेरणादायक है।

स्वर्ण मंदिर की स्थापना कैसे हुई

स्वर्ण मंदिर की नींव सिख धर्म के चौथे गुरु, गुरु राम दास जी ने 16वीं शताब्दी में रखी थी। उन्होंने अमृतसर शहर की स्थापना की और यहां एक पवित्र सरोवर (अमृत सरोवर) बनवाया। इसी सरोवर के बीच में मंदिर बनाने की योजना बनाई गई।

गुरु अर्जन देव जी का योगदान

पांचवें गुरु, गुरु अर्जन देव जी ने इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा करवाया। उन्होंने मंदिर को सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रखा, जिससे यह भाईचारे और समानता का प्रतीक बन गया। यही वह स्थान है जहां गुरु ग्रंथ साहिब को पहली बार स्थापित किया गया।

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चारों दिशाओं में खुले द्वार का महत्व

स्वर्ण मंदिर की खासियत है कि इसके चारों तरफ चार दरवाजे हैं। यह दर्शाता है कि यह मंदिर हर जाति, धर्म और वर्ग के लोगों के लिए खुला है। यह सिख धर्म के “सर्व धर्म समभाव” और समानता के सिद्धांत को दर्शाता है।

स्वर्ण मंदिर को सोने से कब सजाया गया

शुरुआत में यह मंदिर साधारण था, लेकिन 19वीं सदी में महाराजा रणजीत सिंह ने इसे सोने की परत से सजवाया। तभी से इसे “स्वर्ण मंदिर” कहा जाने लगा। इसके बाद यह और भी भव्य और अट्रैक्टीव बन गया।

आज का स्वर्ण मंदिर और इसकी महत्ता

आज स्वर्ण मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और एकता का प्रतीक है। यहां का लंगर दुनिया का सबसे बड़ा सामूहिक भोजन कार्यक्रम है, जहां हर दिन हजारों लोगों को मुफ्त भोजन कराया जाता है।

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