रामजन्मभूमि आंदोलन के समय कारसेवा में शामिल हुए अशोक पुरोहित ने कहा- मैं उस समय अयोध्या गया था और अंदर से विवादित ढांचा देखा था। यह मंदिर की तरह दिखता था। आज सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने भी यह साबित कर दिया कि यह मंदिर है।

होशंगाबाद (मध्य प्रदेश). रामजन्मभूमि आंदोलन के समय कारसेवा में शामिल हुए अशोक पुरोहित की खुशी का पारावार नहीं है कि वह अब अपने जीतेजी राममंदिर देख सकेंगे । बता दें कि वह वर्ष 1992 में अयोध्या में कारसेवा में शामिल हुए थे। उन्होंने अयोध्या मामले पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि अब वह इस जीवन में ही भव्य राम मंदिर देख सकेंगे।

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विवादित ढांचा देखकर आए थे पुरोहित
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उस समय अयोध्या गया था और अंदर से विवादित ढांचा देखा था। यह मंदिर की तरह दिखता था। आज सर्वोच्च न्यायालय के फैसले ने भी यह साबित कर दिया कि यह मंदिर है।’’

पुरोहित ने कहा-अब एक आशा बनी है, जिसको भूल चुके थे
उन्होने कहा, ‘‘अब मैं इस जीवन में भव्य राम मंदिर ही देख सकता हूं। अब एक आशा बनी है जो हम सालों पहले भूल चुके थे।’’

नोट(यह कापी पीटीआई भाषा की है, इसमें हैडिंग के अलावा किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है।)