इंदौर में बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसान कल्याण वर्ष, सिंचाई, डेयरी, फूड प्रोसेसिंग और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई बड़े ऐलान किए।
भोपाल/इंदौर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 15 जुलाई को इंदौर में भगवान बलराम के चित्र का अनावरण कर बलराम कृषि महोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों के हित में कई नई योजनाएं लागू कर रही है। उन्होंने बताया कि आगामी छह महीनों तक प्रदेशभर में किसान कल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से उद्यानिकी, एमएसएमई समेत 16 विभागों को जोड़कर एक समन्वित कार्ययोजना तैयार की गई है। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों, कृषि आधारित कंटेंट तैयार करने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित भी किया गया।
Balram Krishi Mahotsav 2026: किसान कल्याण वर्ष में 16 विभाग मिलकर करेंगे काम
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार कृषि को केवल खेती तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे उद्योग, प्रसंस्करण और बाजार से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि किसान कल्याण वर्ष के तहत अगले छह महीनों में कृषि, उद्यानिकी, एमएसएमई, पशुपालन और अन्य विभागों के सहयोग से कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे किसानों को आधुनिक तकनीक, नई योजनाओं और बाजार की बेहतर जानकारी मिल सके।
MP Industrial Growth: उद्योग और रोजगार के साथ आगे बढ़ रहा मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वर्ष 2025 को उद्योग और रोजगार को समर्पित किया गया था। इसी दिशा में प्रदेश के संभाग, जिला और तहसील स्तर पर औद्योगिक विकास से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने कहा कि आज मध्यप्रदेश तेजी से औद्योगिक निवेश का केंद्र बन रहा है और कई बड़े औद्योगिक समूह प्रदेश में निवेश कर रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
Narmada Water Project: नर्मदा का जल बना इंदौर के विकास की नई ताकत
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है, क्योंकि यहां 250 से अधिक नदियां बहती हैं। उन्होंने बताया कि सरकार की प्रतिबद्धता के कारण इंदौर को मां नर्मदा का जल उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने कहा कि नर्मदा वैली परियोजना की योजना वर्ष 1977 में तैयार हो गई थी, लेकिन लंबे समय तक इस पर अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ। बाद में परियोजना को गति मिली और इसका लाभ मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों को भी मिला।
Farmers Benefit: सिंचाई बढ़ी, गेहूं का समर्थन मूल्य और सोयाबीन पर मिला लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा परियोजनाओं के कारण प्रदेश में सिंचाई का दायरा लगातार बढ़ा है। कभी जहां सिंचित क्षेत्र केवल 7.5 लाख हेक्टेयर था, वहीं अब यह बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। पिछले ढाई वर्षों में ही लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि खेतों तक पानी पहुंचने से उत्पादन बढ़ा है और सरकार किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गेहूं का भाव 2625 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच चुका है। वहीं सोयाबीन उत्पादकों को भावांतर योजना का लाभ भी दिया गया है।
Farm to Market Ecosystem: खेत से बाजार तक तैयार हो रहा नया कृषि मॉडल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार कृषि को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए 'फार्म टू मार्केट' मॉडल पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को शून्य ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है और 31 मार्च तक ऋण चुकाने की अनिवार्यता भी समाप्त की गई है। साथ ही केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-चंबल-कालीसिंध (पीकेसी) परियोजना से बुंदेलखंड और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जा रही हैं, जिससे खेत से लेकर बाजार तक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला विकसित होगी।
PepsiCo Investment: आलू उत्पादक किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में पेप्सिको की यूनिट स्थापित होने से प्रदेश के 32 जिलों के आलू उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन योजना के तहत प्रदेश में बस सेवाओं का विस्तार किया जाएगा, जिससे किसानों और आम नागरिकों दोनों को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
Dairy Development: दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार का बड़ा लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन और डेयरी क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकार ने प्रदेश में दूध उत्पादन को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के तहत 40 लाख रुपये तक की डेयरी इकाई स्थापित करने पर 10 लाख रुपये तक अनुदान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बड़े स्तर पर गोशालाओं का संचालन किया जा रहा है और प्रत्येक गाय के लिए 40 रुपये प्रतिदिन अनुदान दिया जा रहा है। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले निराश्रित मवेशियों के प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
NDDB MoU: पशुपालकों को दूध का बेहतर मूल्य मिलेगा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ समझौता किया है। इसके बाद पशुपालकों को दूध के दाम में 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक अधिक लाभ मिलने लगा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास के लिए भी नई योजनाएं शुरू की हैं, ताकि कृषि के साथ-साथ पशुपालन और मत्स्य पालन से भी किसानों की आय बढ़ाई जा सके।


