मप्र के 29 आईपीएस अफसरों की कार्यशैली शक के कठघरे में आ गई है। यह सवाल किसी और ने नहीं, खुद डीजीपी ने उठाया है। डीजीपी विवेक जौहरी ने 6 जून को एक पत्र लिखा है, जिसमें इन आईपीएस को चेताया गया है। पत्र में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय मे तैनात ये अफसर बिना काम के सैलरी ले रहे हैं। घंटों आफिस से गायब रहते हैं। 2-2 घंटे का लंच करते हैं। 

भोपाल, मध्य प्रदेश. डीजीपी के एक पत्र ने पुलिस विभाग में खलबली मचा दी है। पुलिस मुख्यालय में पदस्थ 29 आईपीएस अफसरों की कार्यशैली शक के कठघरे में आ गई है। यह सवाल किसी और ने नहीं, खुद डीजीपी ने उठाया है। डीजीपी विवेक जौहरी ने 6 जून को एक पत्र लिखा है, जिसमें इन आईपीएस को चेताया गया है। पत्र में कहा गया है कि पुलिस मुख्यालय मे तैनात ये अफसर बिना काम के सैलरी ले रहे हैं। घंटों आफिस से गायब रहते हैं। 2-2 घंटे का लंच करते हैं। हालांकि पत्र में किसी आईपीएस का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन माना जा रहा है डीजीपी पुलिस अफसरों की शैली से नाखुश हैं।

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फोकट की सैलरी ले रहे
डीजीपी ने 6 जून को पुलिस अफसरों को एक पत्र लिखा है। यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। हालांकि इस संबंध में डीजीपी मीडिया से बात करने को राजी नहीं है। उन्होंने यही कहा कि, उन्हें जो कहना था वो कह चुके। पत्र में कहा गया है कि ये आईपीएस लाखों रुपए सैलरी के तौर पर ले रहे हैं। लेकिन काम बिलकुल नहीं करते। कई आईपीएस बिना ऑफिस आए सैलरी उठा रहे हैं। कई लंच टाइम में 2-2 घंटे गायब रहते हैं।

ऑफिस में रहने की हिदायत...
पत्र में तीन आईपीएस के बारे में बताया गया कि वे तो ऑफिस ही नहीं आते। कुछ लंच टाइम में ही घर निकल जाते हैं। ये अधिकारी बिना काम के सारी सरकारी सुविधाएं ले रहे हैं। डीजीपी ने इन्हें हिदायत दी है कि वे सुबह 10.30 से शाम 5.30 बजे तक ऑफिस में रहें। डीजीपी ने नाराजगी जताई कि स्पेशल डीजी, एडीजी और आईजी स्तर तक के अधिकारी दफ्तर में नहीं होते। फोन नहीं उठाते। बता दें कि विवेक जौहरी बेहद सख्त छवि के माने जाते हैं। डीजीपी बनने से पहले वह केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर बीएसएफ में बतौर डीजी कार्यरत थे।