मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति की वजह से राज्य के नागरिकों की उम्र कम हो रही है। भोपाल राज्य में प्रदूषित जिलों की सूची में शीर्ष पर नहीं है। मध्य प्रदेश के अन्य जिले और शहर के लोगों का जीवनकाल घट रहा है और वे बीमार जीवन जी रहे हैं। 

भोपाल. एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स के अनुसार भोपाल, भिंड, मुरैना के लोग क्रमशः 3 वर्ष, 7.6 वर्ष और 6.7 वर्ष ज्यादा जी सकते थे, अगर वायु गुणवत्ता विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुरूप होती।

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इस संस्था ने किया है शोध
भोपाल, 31 अक्तूबर, 2019: शिकागो विश्वविद्यालय, अमेरिका की शोध संस्था ‘एपिक’ (Energy Policy Institute at the University of Chicago-EPIC) द्वारा तैयार ‘वायु गुणवत्ता जीवन सूचकांक’ (Air Quality Life Index - AQLI) का नया विश्लेषण दर्शाता है कि मध्य प्रदेश में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति राज्य के नागरिकों की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) औसतन 3.6 वर्ष कम करती है, और जीवन प्रत्याशा में उम्र बढ़ सकती है अगर यहां के वायुमंडल में प्रदूषित सूक्ष्म तत्वों एवं धूलकणों की सघनता 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर (विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा बताया गया सुरक्षित मानक) के सापेक्ष हो। एक्यूएलआई के आंकड़ों के अनुसार भोपाल के लोग 3 वर्ष ज्यादा जी सकते थे, अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के दिशानिर्देशों को हासिल कर लिया जाता। 

प्रदूषित जिलों में भोपाल सबसे आगे
वर्ष 1998 में, इसी वायु गुणवत्ता मानक को पूरा करने से जीवन प्रत्याशा में 1.5 साल की बढ़ोतरी होती। लेकिन भोपाल राज्य में प्रदूषित जिलों की सूची में शीर्ष पर नहीं है। मध्य प्रदेश के अन्य जिले और शहर के लोगों का जीवनकाल घट रहा है और वे बीमार जीवन जी रहे हैं। उदाहरण के लिए भिंड के लोगों के जीवनकाल में 7.6 साल की बढ़ोतरी होती, अगर वहां विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों का अनुपालन किया जाता। इसी तरह मुरैना, शिवपुर, सतना, शिवपुरी, टीकमगढ़ और सिंगरौली भी इस सूची में पीछे नहीं हैं, जहां के लोगों की जीवन प्रत्याशा में क्रमशः 6.7 वर्ष, 4.4 वर्ष, 4.2 वर्ष, 4.2 वर्ष, 4.2 वर्ष, और 3.9 वर्ष की वृद्धि होती, अगर लोग स्वच्छ और सुरक्षित हवा में सांस लेते।