हैरानी की बात यह है कि जब परिजन वकील सुरेश डागर को लेकर मेडिकल कालेज के गेट नंबर 2 पर इलाज के इंतजार में बैठे थे। तभी मेडिकल कॉलेज में 60 नए बेड वाले नए वार्ड को बनाया जा रहा था। लेकिन इसके बाद भी उन्हें यह कर अंदर नहीं आने दिया कि यहां कोई खाली बेड नहीं है।

रतलाम (मध्य प्रदेश). कोरोना की दूसरी लहर ने इस तरह तांडब मचाया है कि लोग अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ रहे हैं। स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा चुकी हैं। मध्य प्रदेश सरकार के दावों की पोल खोलते हुए ऐसी एक मार्मिक घटना रतलाम से सामने आई है। जहां एक वकील को अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिली। परिजन बिलखते हुए घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। आखिर में मां और भाई बाइक पर ले जाने लगे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही वकील ने बाइक पर ही दम तोड़ दिया।

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एक से दूसरे और तीसरे अस्पताल गए..लेकिन नहीं मिला इलाज
दरअसल, रतलाम शहर के निवासी 40 साल के वकील सुरेश डागर की पिछले कुछ दिनों तबीयत खराब चल रही थी। लेकिन 4 मई मंगलवार उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। ऐसे में पीड़ित को मां और भाई बाइक से सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन ढाई घंटे बाहर इंतजार करने के बाद भी मरीज का इलाज नहीं किया गया। इसके बाद परिजन दुखी होकर मरीज को दूसरे प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। लेकिन वहां भी इलाज नहीं मिल सका। परिजन अब बाइसे तीसरे अस्पताल की तरफ निकल पड़े। लेकिन वहां पहुंचने से पहले रास्ते में वकील की सांसे थम गईं।

मां बोली-मेरे बेटे को सरकारी सिस्टम ने मार डाला
पुलिसकर्मियों ने जब पीड़ित परिवार को देखा तो उन्होंने फौरन एंबुलेंस को कॉल कर बुलाया। जिसके बाद वकील सुरेश को रतलाम मेडिकल भेजा गया। लेकिन पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बिलखते हुए मां बोली कि अगर समय पर एंबुलेंस और इलाज मिल जाता तो आज उनका बेटा जिंदा होता। हम अपने बेटे को लेकर इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन मदद करने कोई नहीं आया। 

60 नए बेड का बना कोविड वार्ड..फिर नहीं किया इलाज
हैरानी की बात यह है कि जब परिजन वकील सुरेश डागर को लेकर मेडिकल कालेज के गेट नंबर 2 पर इलाज के इंतजार में बैठे थे। तभी मेडिकल कॉलेज में 60 नए बेड वाले नए वार्ड को बनाया जा रहा था। लेकिन इसके बाद भी उन्हें यह कर अंदर नहीं आने दिया कि यहां कोई खाली बेड नहीं है। बताया जाता है कि जिस वक्त यह सब हुआ वहां पर विधायक चैतन्य कश्यप और जिला कलेक्टर के साथ तमाम बड़े अफसर भी मौजूद थे। इसके बाद भी उन्हें वहां से लौटा दिया गया। बता दें कि वकील कोरोना संदिग्ध था इसलिए उसका अंतिम संस्कार कोरोना प्रोटोकॉल के तहत किया गया।