मनसे प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है कि देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू किया जाए। उसके साथ ही उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाए जाने की मांग की है।

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे (Raj Thackeray) ने रविवार को पुणे में एक जनसभा किया। इस दौरान राज ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने और जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री से मेरा आग्रह है कि जल्द से जल्द समान नागरिक संहिता लाएं, जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाएं और औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर करें।"

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ठाकरे ने महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार पर हमला किया और उनपर एआईएमआईएम को औरंगाबाद की लोकसभा सीट जीतने की अनुमति देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ पार्टियों ने एआईएमआईएम को महाराष्ट्र में पंख फैलाने की अनुमति दी। यह चौंकाने वाला है कि एआईएमआईएम उम्मीदवार (इम्तियाज जलील) ने शिवसेना के उम्मीदवार (चंद्रकांत खैरे) को हरा दिया। 

राज ठाकरे ने कहा कि एआईएमआईएम के निर्वाचित जनप्रतिनिधी औरंगजेब के मकबरे पर गए और फूल चढ़ाया। वह मुगल राजा छत्रपति शिवाजी महाराज को मारने के लिए इस क्षेत्र में आया था। मैंने सोचा था कि इस घटना से महाराष्ट्र उबलने लगेगा, लेकिन शरद पवार साहब ने कहा कि औरंगजेब यहां अपना राज्य फैलाने के लिए आया था।

स्वास्थ्य कारण से स्थगित किया अयोध्या दौरा 
राज ठाकरे ने रैली में अपना अयोध्या दौरा स्थगित करने का कारण बताया। उन्होंने कहा कि मुझे अपने स्वास्थ्य कारण से अयोध्या दौरा स्थगित करना पड़ा। उन्होंने कहा, "मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं ताकि मीडिया द्वारा कोई गलत सूचना न फैलाई जाए। दो दिन पहले मैंने अपनी अयोध्या यात्रा स्थगित करने के बारे में ट्वीट किया था। मैंने जानबूझकर बयान दिया ताकि सभी को अपनी प्रतिक्रिया देने का मौका मिले। जो लोग मेरी अयोध्या यात्रा के खिलाफ थे, वे मुझे फंसाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मैंने इस विवाद में नहीं पड़ने का फैसला किया। मैंने लाउडस्पीकर का विरोध किया। यह कई लोगों को पसंद नहीं आया। उनलोगों ने मेरे खिलाफ जाल बिछाया था। 

कार्यकर्ताओं को कानूनी लड़ाई में नहीं डाल सकता
मुझे पता है कि यूपी में तनाव चल रहा है। अगर मैं वहां गया होता तो शायद किसी ने मुझपर हमला किया होता और मेरे मनसे कार्यकर्ताओं ने मुंहतोड़ जवाब दिया होता। इसके बाद मेरे मनसे कैडर के खिलाफ मामले दर्ज होते। यह मेरे और मेरे मनसे कैडर के लिए एक जाल था। इसलिए, मैंने थोड़ी देर इंतजार करने का फैसला किया। उन्होंने आगे कहा कि वह आलोचना सहने के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को कानूनी लड़ाई में नहीं डाल सकते।