Instagram अकाउंट हैक, X हैंडल सस्पेंड और फिर अचानक वापसी-कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को लेकर रहस्य और गहरा गया है। संस्थापक अभिजीत दिपके का दावा है कि Meta रिकवरी भी नाकाम रही। BJP, कांग्रेस और Gen Z राजनीति के बीच CJP का डिजिटल उभार अब राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुका है।
नई दिल्ली। देश की युवा पीढ़ी और इंटरनेट की दुनिया में इन दिनों एक नाम सबसे तेज़ी से गूंज रहा है-'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP)। कुछ ही दिनों के भीतर देश की सबसे बड़ी और पुरानी राजनीतिक पार्टियों को सोशल मीडिया पर पछाड़ने वाले इस डिजिटल आंदोलन के पीछे अब एक बड़ी साज़िश की बू आने लगी है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने एक बेहद चौंकाने वाला और सार्वजनिक बयान जारी कर दावा किया है कि उनका निजी इंस्टाग्राम (Instagram) अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया है और अब उनका अपने ही अकाउंट पर कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। इस खबर के सामने आते ही उन लाखों युवाओं और फॉलोअर्स के बीच चिंता की लहर दौड़ गई है, जो इस व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन को देश का नया डिजिटल मोर्चा मान रहे थे।

आधी रात को लगा बड़ा झटका: बार-बार फेल हुई 'मेटा' की रिकवरी
अभिजीत दिपके ने इस पूरे मामले की गंभीरता को सोशल मीडिया पर कुछ स्क्रीनशॉट्स शेयर करके उजागर किया है। दिपके के मुताबिक, उन्होंने अपने अकाउंट को वापस पाने के लिए 'मेटा' (Meta) की आधिकारिक रिकवरी प्रक्रिया का सहारा लिया और बार-बार कोशिश की। लेकिन हर बार उनके हाथ सिर्फ़ नाकामी लगी। जब भी वे "अभी रिकवर करें" (Recover It Now) के विकल्प पर क्लिक करते, तो स्क्रीन पर एक रहस्यमयी और सुरक्षा से जुड़ा संदेश पॉप-अप हो जाता:
"हमने आपकी सुरक्षा के लिए आपका Instagram अकाउंट लॉक कर दिया है। अपने अकाउंट को वापस पाने के लिए, आपको अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी और एक नया पासवर्ड बनाना होगा।"

सस्पेंस इस बात को लेकर गहरा गया है कि कई बार सही प्रक्रिया अपनाने के बावजूद उन्हें यही ऑटोमेटेड जवाब मिलता रहा। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक साधारण हैकिंग है, या फिर इस तेज़ी से बढ़ते डिजिटल आंदोलन की आवाज़ को दबाने का कोई बड़ा और सोची-समझी डिजिटल साज़िश का हिस्सा?
कभी X हैंडल सस्पेंड, कभी बैकअप अकाउंट बंद... आखिर पर्दे के पीछे कौन?
CJP के लिए यह हफ़्ते का पहला झटका नहीं था। दिपके ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट X पर अपनी पुरानी पोस्ट को री-शेयर करते हुए लिखा कि न सिर्फ उनका पर्सनल अकाउंट, बल्कि पार्टी का बैकअप इंस्टाग्राम अकाउंट भी ऑनलाइन तेज़ी से बढ़ते फॉलोअर्स के बीच कुछ समय के लिए अचानक बंद (सस्पेंड) कर दिया गया था। हालांकि, भारी दबाव के बाद उसे कुछ घंटों में बहाल कर दिया गया।
इससे पहले CJP के मुख्य X हैंडल को भी भारत में ब्लॉक कर दिया गया था। लेकिन इस ग्रुप ने हार नहीं मानी और "Cockroach Is Back" नाम से नए हैंडल के साथ डिजिटल दुनिया में धमाकेदार वापसी की। नए अकाउंट से उन्होंने अपने आलोचकों पर तंज कसते हुए लिखा— "क्या आपको लगा कि आप हमसे छुटकारा पा सकते हैं? Lol (हाहाहा)"। पार्टी का साफ इशारा है कि जैसे ही CJP ने इंस्टाग्राम पर देश के दिग्गज राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ना शुरू किया, वैसे ही उनके अकाउंट्स पर ताबड़तोड़ डिजिटल हमले शुरू हो गए।
जब 'कॉकरोच' के आगे बौनी साबित हुईं देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियां!
यह पूरा विवाद तब और ज़्यादा गंभीर हो जाता है, जब हम CJP की हैरान कर देने वाली लोकप्रियता के आंकड़ों पर नज़र डालते हैं। जो कुछ दिन पहले महज़ एक इंटरनेट व्यंग्य (Satire) के रूप में शुरू हुआ था, वह आज भारत का सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला डिजिटल राजनीतिक आंदोलन बन चुका है।
CJP का इंस्टाग्राम पर महा-उभार
- 1. लॉन्चिंग के कुछ ही दिनों के भीतर मिलियंस में फॉलोअर्स
- 2. सोशल मीडिया फॉलोअर्स की रेस में सत्ताधारी BJP को पछाड़ा
- 3. 141 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी को भी पीछे छोड़ नंबर 1 बनी
Gen Z (युवा पीढ़ी), मीम्स की ताक़त, ऑनलाइन एक्टिविज़्म और देश में बेरोज़गारी, NEET परीक्षा पेपर लीक और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर युवाओं में भरे गुस्से ने CJP को रातों-रात अर्श पर पहुँचा दिया।
"राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा" या "युवाओं की बुलंद आवाज़"?
जैसे-जैसे इस पार्टी का ग्राफ़ ऊपर जा रहा है, राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। सत्ताधारी दल के समर्थकों ने इस संगठन को "राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित ख़तरा" घोषित कर दिया है। सोशल मीडिया पर कुछ यूज़र्स तो इस आंदोलन के तार 'ISI' और मुख्य विपक्षी पार्टियों से जुड़े होने के सनसनीखेज आरोप भी लगा रहे हैं। दूसरी ओर, देश के कई दिग्गज विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सेलिब्रिटीज़ ने इस आंदोलन का खुलकर समर्थन किया है।
CJP की शुरुआत और इसकी विचारधारा:
- संस्थापक: अभिजीत दिपके (बोस्टन में रहने वाले पूर्व सोशल मीडिया कैंपेनर, जो 2020 में AAP के लिए काम कर चुके हैं)।
- शुरुआत की वजह: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना "कॉकरोच और परजीवियों" से किए जाने के बाद यह गुस्सा आंदोलन में बदला (हालांकि बाद में मुख्य न्यायाधीश ने सफाई दी थी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया)।
- नारा: "धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, आलसी"
- मुख्य एजेंडा: चुनावी सुधार, संस्थागत जवाबदेही, महिलाओं के लिए आरक्षण और NEET जैसी परीक्षाओं की धांधली के खिलाफ सख्त एक्शन।
अकाउंट्स पर लग रही पाबंदियों के बीच CJP के फॉलोअर्स की संख्या हर सेकंड बढ़ रही है। अब देखना यह है कि यह इंटरनेट-आधारित डिजिटल विरोध क्या आने वाले समय में एक औपचारिक राजनीतिक दल का रूप लेता है, या फिर टेक-जायंट्स और सत्ता के चक्रव्यूह में उलझकर रह जाता है। पर एक बात तय है— आने वाले दिनों में यह विवाद थमने वाला नहीं है।


