मां का कहना कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही राज्यसभा से भी यह बिल पास हो जाएगा। आरती ने बताया कि जब बेटी बड़ी होकर पूछेगी कि उसका नाम ‘नागरिकता’ क्यों रखा गया तो मैं उसे बताऊंगी कि बेटा तेरे आने से ही हमें पहचान मिली है। 

नई दिल्ली. पाकिस्तान से दिल्ली आए हिंदू शरणार्थियों को लंबे अरसे के बाद आखिरकार भारतीय पहचान हासिल हो गई है। लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल के पास होने के बाद वो राज्यसभा में भी इसके पारित होने की उम्मीद लगा रहे हैं। इसके बाद से उनकी खुशी देखी जा रही है। एक पाकिस्तानी हिंदू मां को इस बिल के पेश होने की इतनी खुशी है कि उसने अपनी नवजात बच्ची का नाम ही नागरिकता रख दिया है। 

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दिल्ली के मजनू का टीला में रहने वाले हिंदू शरणार्थियों कई सालों से अपनी पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं। इस बीच मंगलवार को यहां एक बच्ची का जन्म हुआ। लोगों को भारत की नागरिकता मिलने की इतनी खुशी है कि इस बच्ची का नाम उन्होंने ‘नागरिकता’ रख दिया।

7 साल पहले आए थे भारत

यहां रहने वाली आरती ने बताया कि 7 साल पहले वह पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर अपने देश भारत आए थे। यहां दिल्ली के मजनू का टीला में उन्होंने अपना नया आशियाना बनाया था, लेकिन पहचान नहीं मिली। लंबे अरसे से इंतजार था कि उन्हें भारतवासी होने की पहचान मिले। पर अब जब मोदी सरकार ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास कर दिया तो उम्मीद जगी है कि अब हमें नई पहचान मिलेगी।

उम्मीद की नई किरण बनकर आई बेटी

आरती ने बताया कि उन्होंने अपनी नवजात बच्ची का नाम नागरिकता रखा है, क्योंकि बच्ची के पैदा होने पर ही यह बिल पास हुआ और उन्हें एक उम्मीद की नई किरण नजर आई कि सालों से जिस पहचान के लिए लड़ रहे थे, वो अब उन्हें मिलने वाली है।

‘बेटी को बताऊंगी, क्यों रखा ये नाम

मां का कहना कि हमें उम्मीद है कि जल्द ही राज्यसभा से भी यह बिल पास हो जाएगा। आरती ने बताया कि जब बेटी बड़ी होकर पूछेगी कि उसका नाम ‘नागरिकता’ क्यों रखा गया तो मैं उसे बताऊंगी कि बेटा तेरे आने से ही हमें पहचान मिली है। इसलिए हमने तेरा नाम नागरिकता रखा था।