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किसान आंदोलन का 100वां दिन, कृषि मंत्री ने कहा - सरकार कानूनों में संशोधन के लिए तैयार, उठाए ये सवाल

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा कि केंद्र सरकार इन कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है। वहीं, उन्होंने आंदोलन की मंशा पर भी सवाल उठाए।
 

Agriculture minister Narendra Singh Tomar says centre is ready to amend farm laws MJA
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New Delhi, First Published Mar 7, 2021, 1:16 PM IST
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नेशनल डेस्क। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के 100 दिन पूरे होने पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) ने कहा कि केंद्र सरकार इन कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है। वहीं, उन्होंने आंदोलन की मंशा पर भी सवाल उठाए। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अपना स्थान और महत्व है, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने की कीमत पर ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसानों के आंदोलन से किसका फायदा होगा, इस पर कोई भी विचार नहीं कर रहा है। कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के साथ वार्ता करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसानों की भावनाओं का सम्मान करते हुए सरकार कृषि कानूनों में संशोधन के लिए तैयार है, लेकिन प्रदर्शनकारी किसान कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अडिग हैं। 

विपक्षी दलों पर साधा निशाना
केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार ने नए कृषि कानूनों में संशोधन करने के लिए तैयार है, लेकिन कुछ विपक्षी दल किसानों को गुमराह कर अपना राजनीतिक हित साधना चाहते हैं। आंदोलन की आड़ में राजनीतिक मंसूबा पूरा करने की कोशिश करना गलत है। कृषि मंत्री ने कहा कि कृषि अर्थव्यवस्था के नुकसान पहुंचाने और किसानों के हित की अनदेखी कर आंदोलन चलाना गलत है। इसके लिए उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधा।

12 बार हुई किसानों से वार्ता
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उन्होंने 12 बार किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से लंबी चर्चा की, लेकिन उसका कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आ सका। उन्होंने कहा कि कई जरूरी विषयों पर संशोधन का भी प्रस्ताव दिया। कृषि मंत्री ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में उन्होंने सरकार के पक्ष को रखा, साथ ही संसद में हर दल से सदस्यों से इस विषय पर चर्चा की, लेकिन कृषि सुधार बिल में किस बिंदु पर आपत्ति है, इसे लेकर किसी ने कुछ भी नहीं कहा।

किसान को मारकर राजनीति नहीं की जा सकती
कृषि मंत्री तोमर ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति, विरोध और आंदोलन का अपना स्थान है, लेकिन देश के हित के नुकसान की कीमत पर ऐसा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्या किसान को मारकर राजनीति की जाएगी, देश की कृषि अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर राजनीतिक मंसूबों को पूरा किया जाएगा, इस पर विचार किए जाने की जरूरत है। इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य दर्शन पाल ने कहा कि किसान संगठन कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की अपनी मांग पर अडिग हैं और उनका आंदोलन जारी रहेगा।   
 

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