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LAC पर China से तनाव के बीच स्वदेशी Anti Airfield Weapon का सफल परीक्षण, खूबी जानकर दुश्मनों के होश उड़ जाएंगे

डीआरडीओ लैब (DRDO Lab) के समन्वय और आईएएफ (IAF) के सहयोग से स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार को RCI द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। 

Anti Airfield Weapon successfully tested in Jaisalmer Pokhran range, DRDO and IAF tested indigenous model
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Jaisalmer, First Published Nov 4, 2021, 3:34 PM IST
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नई दिल्ली। इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force) की ताकत में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। एयरफोर्स ने स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपंस (Smart Anti Airfield Weapon) के दो उड़ानों का परीक्षण किया है। राजस्थान (Rajasthan) के जैसलमेर (Jaisalmer) में पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज (Pokhran Field Firing Range) में  परीक्षण किए हैं। इसे संयुक्त रूप से भारत में डेवलप किया गया है। यह वेपन एक तरह की मिसाइल है, जो जगुआर फाइटर प्लेन (jaguar fighter plane) में लगती है।

स्वदेशी रूप से विकसित है इलेक्ट्रो ऑप्टिक सेंसर

यह परीक्षण पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में इससे पहले 28 अक्टूबर को भी किया गया था। अलग अलग हुए हुए दो परीक्षण, सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल सेंसर आधारित था। अंतिम और सफल परीक्षण बुधवार को जैसलमेर जिले की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में वायुसेना के प्लेन से लॉन्चिंग कर किया गया। 

किसने किया है विकसित ?

डीआरडीओ लैब (DRDO Lab) के समन्वय और इंडियन एयरफोर्स (IAF) के सहयोग से स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार को RCI द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, IAF और मिशन से जुड़ी टीमों के प्रयासों की सराहना की है। 

100 किलोमीटर की रेंज तक पहुंचा सकता है यह गाइडेड बम

डिफेंस मिनिस्ट्री सूत्रों के मुताबिक इस गाइडेड बम को सटीक नेविगेशन प्रणाली की मदद से जगुआर विमान के जरिए छोड़ा गया। यह बम 100 किलोमीटर की रेंज से आगे सटीक तौर पर पहुंचा। सिस्टम का इलेक्ट्रो ऑप्टिकल कॉन्फिगरेशन इमेजिंग इंफ्रा-रेड सीकर तकनीक से लैस है। जो हथियार की सटीक मारक क्षमता को बढ़ाता है। दोनों परीक्षणों में टारगेट को सटीकता के साथ हिट कर मारा गया। सिस्टम को अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी के लिए डिजाइन किया गया है।

भारत मेक इन इंडिया को दे रहा बढ़ावा

रक्षा मंत्रालय द्वारा मेक इन इंडिया को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले कुछ समय से हो रही रक्षा खरीद में अधिक से अधिक बजट स्वदेशी कंपनियों या मेक इन इंडिया के तहत खर्च किया जा रहा है। 

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