केरल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां जाति और धार्मिक समीकरण चुनाव में जीत में अहम भूमिका निभाएंगे। Asianet News-CFore सर्वे में यह बात सामने निकलकर आई है। 

नई दिल्ली. केरल में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। यहां जाति और धार्मिक समीकरण चुनाव में जीत में अहम भूमिका निभाएंगे। Asianet News-CFore सर्वे में यह बात सामने निकलकर आई है। 

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सर्वे में 272 शहरी और 811 ग्रामीण जगहों पर 10396 लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। इस सर्वे के मुताबिक, राज्य की सत्ताधारी एलडीएफ को एक बार फिर मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़े वर्ग के अलावा शक्तिशाली एझावा समुदाय का समर्थन मिलता दिख रहा है। 

इस सर्वे के मुताबिक, 41% दलित, 47% मुस्लिम और 45% एझावा समुदाय और 43% अन्य पिछड़ी जातियों का वोट एलडीएफ को मिलता दिख रहा है। 

वहीं, कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ फ्रंट की बात करें, तो उसे क्रिश्चियन , नायर और मर्थोमा समुदाय का वोट मिलता दिख रहा है। इस सर्वे में यूडीएफ को 58% क्रिश्चियन, 52% जैकोबाइट, 59% सीरियन क्रिश्चियन, और 51% मर्थोमा समुदाय के लोग वोट देते नजर आ रहे हैं। 

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट सीरिया चर्च ग्रुपों के बीच सदियों पुराने विवाद में दखल देने के बाद से भाजपा का असर इन समुदायों पर नजर आ रहा है। सर्वे में यह नजर आ रहा है कि भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए ने जाति और आस्था समूहों में बड़े पैमाने पर बढ़त बना ली है। यह चुनाव में गठबंधन के दौरान बेहतर सीट शेयरिंग और वोट शेयर में नजर आ सकता है।