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Assam Clash: अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस को मारने 10000 उपद्रवी कहां से आए? PFI पर साजिश रचने का शक

असम(Assam Clash) के दरांग जिले में गुरुवार को कब्जा हटाने के दौरान पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में संदिग्ध संगठन PFI की भूमिका सामने आ रही है। 

Assam clash  PFI involvement can be there in attack on police
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Guwahati, First Published Sep 25, 2021, 2:04 PM IST
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गुवाहाटी. असम(Assam Clash) के दरांग जिले में गुरुवार को कब्जा हटाने के दौरान पुलिस और अतिक्रमणकारियों के बीच हुई हिंसक झड़प में संदिग्ध संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का नाम सामने आ रहा है। हालांकि असम सरकार ने अभी स्पष्टतौर पर उसका नाम नहीं लिया, लेकिन खुफिया सूत्रों से सरकार को पता चला है कि पुलिस पर हमला कराने में PFI का हाथ हो सकता है। इस मामले की न्यायिक जांच की जा रही है। हिंसा के बीच पुलिस की गोलीबारी में 2 लोगों की मौत हो गई थी।

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10000 लोग कहां से आए?
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया से कहा-60 परिवारों का हटाने का काम था, लेकिन 10,000 लोग आए। कौन लेकर आया इतने लोगों को? पुलिस पर हमला क्यों किया? इन सब में PFI का नाम आ रहा, लेकिन मैं इस पर कुछ नहीं कहूंगा। न्यायिक प्रमाण में देखेंगे कि PFI शामिल था या नहीं।

PFI पर बैन लग सकता है
PFI की सुरक्षा में एक खतरा बताया जाता रहा है। इस संगठन के सिमी आतंकवादियों से लेकर पाकिस्तानी आतंकवादियों से तक संबंध सामने आते रहे हैं। सरकार तमाम इनपुट और एविडेंस के आधार पर इस संगठन पर बैन लगाने की तैयारी में है। अकेले मप्र में  PFI के 650 से ज्यादा सदस्य सक्रिय हैं। संगठन का इंदौर, उज्जैन, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम समेत प्रदेश में नेटवर्क है।

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फरवरी, 2020 में हुए दिल्ली दंगे में भी आया था नाम सामने
फरवरी, 2020 में नागरिकता (संशोधन-CAA) अधिनियम, 2019 के खिलाफ हो रहे आंदोलन के दौरान दंगा भड़का था। हिंसा देश के कुछ अन्य राज्यों में भी हुई थी। इन दंगों में भी PFI का नाम सामने आया था। इस संगठन की स्थापना 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के उत्तराधिकारी के रूप में हुई थी। इसका मुख्यालय शाहीन बाग में है, जहां CAA के खिलाफ 100 दिनों तक धरना चला था। यह एक इस्लामिक संगठन है। कहने को यह पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के हक की आवाज उठाने की बात करता है, लेकिन इसकी गतिविधियां हिंसक और भड़काने वाली रही हैं।

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सुर्खियों में है असम का मुद्दा
असम का मुद्दा इस समय सुर्खियों में है। पाकिस्तान के सूचना एवं ब्रॉडकास्ट मिनिस्टर फवाद चौधरी ने tweet करके कहा था कि कश्मीर के बाद असम से सुरक्षाबलों के मुसलमानों पर अत्याचार के वीडियो सामने आए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस मामले में जिले के एसपी मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के भाई हैं, इसलिए ऐसा हुआ। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने tweet करके कहा था-जब देश में नफरत का जहर फैलाया जा रहा है, तो कैसा अमृत महोत्सव? अगर सबके लिए नहीं है, तो कैसी आजादी? इस मामले में लाश पर कूदने वाले कैमरामेन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

जानें पूरा मामला...
गुरुवार को सरकारी जमीन से कब्जा हटाने पहुंची पुलिस पर अतिक्रमणकारियों ने हमला कर दिया था। इसमें 9 से अधिक पुलिस जवान घायल हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में 2 लोगों की मौत हो गई। अतिक्रमणकारियों ने जब पुलिस पर पथराव और लाठियों से हमला किया, तो पुलिस को फायर करने पड़े। दरांग एसपी सुशांत बिस्वा सरमा ने बताया कि अतिक्रमणकारियों ने पुलिस पर हमला किया था। बता दें कि सुशांत असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के भाई हैं। इस मामले की जांच राज्य सरकार ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से करवाने की घोषणा की थी। क्लिक करके पढ़ें
 

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