बेंगलुरु में अतुल सुभाष ने आत्महत्या कर ली। 24 पन्नों के सुसाइड नोट और वीडियो में पत्नी और ससुराल वालों पर प्रताड़ना का आरोप लगाया। पत्नी निकिता पर केस दर्ज।

Atul Subhash Suicide: बेंगलुरु में अतुल सुभाष की आत्महत्या सुर्खियों में है। मरने से पहले अतुल ने 24 पेज का सुसाइड नोट लिखा और वीडियो बनाया। उन्होंने बताया कि पत्नी और उसके घरवालों की प्रताड़ना से परेशान होकर जान दे रहे हैं।

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अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया अब जांच के दायरे में है। बेंगलुरु पुलिस ने उसपर आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में केस दर्ज किया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस बीच निकिता सिंघानिया द्वारा 2022 में अतुल के खिलाफ की गई शिकायत सामने आई है। निकिता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि उनके पति और उनके माता-पिता ने दहेज के रूप में 10 लाख रुपए मांगे।

जौनपुर के कोतवाली थाने में 24 अप्रैल, 2022 को भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता), 323 (हमला), 504 (शांति भंग करने के लिए जानबूझकर अपमान), 506 (आपराधिक धमकी) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के तहत केस दर्ज किया गया था। निकिता ने अतुल पर दहेज के लिए पीटने का आरोप लगाया था। उसने अतुल के माता-पिता और भाइयों को भी आरोपी बताया था। दोनों की शादी 26 अप्रैल 2019 को हुई थी।

निकिता का आरोप दहेज की मांग के पिता को पड़ा दिल का दौरा

निकिता ने FIR में आरोप लगाया कि दहेज के लिए उसके पति और ससुराल वालों ने उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया। निकिता ने कहा, "जब मैंने अपने माता-पिता को उत्पीड़न और दहेज के बारे में बताया तो मेरे माता-पिता ने समझाया कि सब ठीक हो जाएगा, साथ रहो। लेकिन मेरे पति और ससुराल वालों में कोई सुधार नहीं हुआ।"

निकिता ने अपनी शिकायत में कहा, "अतुल शराब पीकर मुझे जानवर की तरह पीटता था। वह मुझे धमकाकर मेरे खाते से मेरी पूरी सैलरी अपने खाते में ट्रांसफर कर लेता था। इस तनाव के कारण मेरे पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई। 17 अगस्त 2019 को दहेज की मांग के कारण उन्हें दौरा पड़ा और बाद में उनकी मौत हो गई।"

कोर्ट ने निकिता को गुजारा भत्ता देने से किया इनकार

अतुल का केस देख रहे वकील दिनेश मिश्रा ने बताया कि निकिता ने उनके खिलाफ कई बार केस दर्ज कराए थे। इनमें से एक अहम केस फैमिली कोर्ट में चल रहा था। इसमें निकिता ने अपने और अपने बच्चे के भरण-पोषण के लिए अर्जी लगाई थी। कोर्ट ने इस मामले में पत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार कर दिया, लेकिन बच्चे के भरण-पोषण के लिए 40,000 रुपए प्रतिमाह देने का आदेश दिया।

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