सर्दियों में अकसर लोग कमरा बंद करके कोयले या लकड़ी की अंगीठी जलाकर सोते हैं, लेकिन यह जिंदगी पर भारी पड़ सकता है! हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें अंगीठी से उठे धुएं के कारण बंद कमरे में दम घुटने से लोगों की मौत हो जाती है। पढ़िए एक ताजा मामला और जानिए क्यों होती है मौत?

डेस्क न्यूज. सर्दियों में अकसर लोग कमरा बंद करके कोयले या लकड़ी की अंगीठी जलाकर सोते हैं, लेकिन यह जिंदगी पर भारी पड़ सकता है! हर साल ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जिनमें अंगीठी से उठे धुएं के कारण बंद कमरे में दम घुटने से लोगों की मौत हो जाती है। पढ़िए एक ताजा मामला और जानिए क्यों होती है मौत?

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पहले पढ़ते हैं यूपी का नया मामला
यह मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ के जियामऊ का है। यहां शनिवार(10 दिसंबर) देर शाम एमए की छात्रा श्रेया यादव (22) की दम घुटने से मौत हो गई। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो देखा कि कमरे में बिस्तर पर छात्रा का शव पड़ा हुआ था। समीप एक अंगीठी जल रही थी। पूरे कमरे में धुआं भरा हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया है।

हुआ यूं था कि जियामऊ निवासी रामवृक्ष यादव बछरावां में टीचर हैं। उनकी पत्नी सीता यादव भी टीचर हैं। कपल शनिवार सुबह स्कूल चले गए थे। श्रेया घर पर थी। देर शाम जब कपल ड्यूटी से घर पहुंचे, तो देखा कि दरवाजा अंदर से बंद था। उन्होंने जब खिड़की से धुंआ निकलता देखा, तो डर गए। लगा कि अंदर आग लग गई है। इस पर तुरंत पुलिस को बुलाया गया। इंस्पेक्टर गौतमपल्ली पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। जब दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची, तो देखा कि श्रेया बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी, जबकि कमरे में अंगीठी जल रही थी। पुलिस के मुताबिक श्रेया कमरे में अंगीठी जलाकर सो रही थी। डॉक्टरों के अनुसार, कार्बन मोनो ऑक्साइड से श्रेया की जान गई।

जानिए क्यों नहीं जलाना चाहिए बंद कमरे में अंगीठी
1. एक्सपर्ट बताते हैं कि कोयले की अंगीठी जलाने सेकार्बन मोनो ऑक्साइड निकलती है। यह जहरीली गैस सांस की नली से अंदर जाने के बाद दिमाग में खून की सप्लाई बाधित कर देती है। इससे दम घुट जाता है या ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है। 

2. डॉक्टर सचेत करते हैं कि जिन कमरों में हवा निकले का रास्ता न हो, वहां अंगीठी जलाकर बिलकुल नहीं सोना चाहिए। कई बार लोग कमरा इसलिए बंद कर लेते हैं कि अंगीठी की गर्मी से वो गर्मी बना रहे। लेकिन यह भूल जाते हैं कि कमरे में धुआं भी भरेगा।

3. एक्सपर्ट कहते हैं कि चूल्हा जलाते समय भी घर की खिड़कियां, रौशनदान और दरवाजे खोल कर रखें। इससे कमरे में वेंटिलेशन बना रहेगा। धुएं को निकलने का रास्ता मिलेगा।

4.डॉक्टरों के अनुसार, कार्बन मोनोऑक्साइड एक जहरीली गैस होती है। जिन जगहों पर कोयला या लकड़ी जल रही हो और वेंटिलेशन का कोई जरिया न हो यानी हवा का कोई रास्ता न हो, वहां सांस लेने पर ऑक्सीजन के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड भी खींचते हैं। कार्बन मोनोऑक्साइड हीमोग्लोबिन के साथ मिलकर कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन में बदल जाती है। खून में मौजूद RBC, ऑक्सीजन की तुलना में कार्बन मोनोऑक्साइड से पहले जुड़ती है। यह जानलेवा साबित होती है।

5. यह स्थिति ऑक्सीजन की सप्लाई में रोड़ा बनती है। इससे हाईपोक्सिया की नौबत आ जाती है यानी शरीर के ऊतक (टिशू) मरने लगते हैं।

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