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Axiom 4 Mission: शुभांशु शुक्ला ने कैसे की ISS मिशन की तैयारी? उड़ान भरने से पहले पूरी की ये कठिन ट्रेनिंग
Shubhanshu Shukla Axiom 4 Mission Training: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के साथ ISS के लिए उड़ान भर ली है। ISS पर जाने वाले वह पहले भारतीय हैं। इस बीच जानिए इस मिशन के लिए कैसे और कहां-कहां उनकी कड़ी ट्रेनिंग हुई। क्या है मिशन का मकसद।

शुभांशु शुक्ला ने Axiom-4 मिशन के साथ ISS के लिए भरी उड़ान
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, Axiom-4 मिशन के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भर चुके हैं। इस मिशन में वे भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, उनकी यह ऐतिहासिक उड़ान एक दिन में नहीं बनी। इसके पीछे सालों की मेहनत, कड़ी ट्रेनिंग और तैयारी शामिल है। जानिए इसके बारे में।
Axiom-4 मिशन के लिए शुभांशु शुक्ला की कैसे हुई ट्रेनिंग
Axiom-4 मिशन के लिए शुभांशु शुक्ला की जर्नी 2019 से शुरू हुई इस यात्रा में उन्होंने रूस, भारत और अमेरिका में अलग-अलग मिशन स्पेसिफिक ट्रेनिंग ली, ताकि अंतरिक्ष में किसी भी चुनौती का डटकर सामना कर सकें।
रूस में शुरू हुई शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्री बनने की ट्रेनिंग
शुभांशु को 2019 में भारत के गगनयान मिशन के लिए चार संभावित अंतरिक्ष यात्रियों में चुना गया था। इसके बाद उन्होंने रूस के मशहूर यूरी गगारिन कोस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर, स्टार सिटी (मॉस्को) में एक साल तक बेहद कठिन ट्रेनिंग ली। यह ट्रेनिंग स्पेसक्राफ्ट सिस्टम, इमरजेंसी सिचुएशन से निपटना और अंतरिक्ष में सर्वाइवल स्किल्स सिखाने पर केंद्रित थी।
बेंगलुरु में ISRO के साथ मिशन की बारीकियों पर किया फोकस
रूस से लौटने के बाद शुभांशु ने ISRO के बेंगलुरु स्थित ट्रेनिंग सेंटर में आगे की ट्रेनिंग ली। यहां उन्होंने खास तौर पर भारतीय वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देने, स्पेस मिशन के दौरान होने वाले काम और रूटीन प्रैक्टिस पर ध्यान केंद्रित किया।
SpaceX और Axiom के साथ शुभांशु शुक्ला की एडवांस ट्रेनिंग
Axiom-4 मिशन से पहले शुभांशु ने अमेरिका में SpaceX की Crew Dragon स्पेसक्राफ्ट में स्पेशल ट्रेनिंग ली। इसमें उन्होंने फुल-सूट रिहर्सल, इमरजेंसी सिचुएशन का हैंडलिंग, नेविगेशन, डॉकिंग और पायलट ड्यूटी से जुड़े सिम्युलेशन पूरे किए। यह ट्रेनिंग अंतरराष्ट्रीय क्रू के साथ हुई, जिसमें अनुभवी अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन भी शामिल रहीं।
ISS पर करने के लिए वैज्ञानिक प्रयोगों की खास तैयारी
ISS पर शुभांशु सात भारतीय वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे। इनमें माइक्रोग्रैविटी में शरीर की मांसपेशियों पर असर, माइक्रोबियल अडैप्टेशन, स्क्रीन के उपयोग का मानसिक प्रभाव और अंतरिक्ष में फसल की सहनशक्ति जैसे विषय शामिल हैं।
योग और भारतीयता की छाप भी स्पेस पर छोड़ेंगे शुभांशु शुक्ला
शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में सिर्फ साइंस ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी पेश कर रहे हैं। वो योग, ध्यान और भारतीय व्यंजन तैयार करने जैसे कार्य भी स्पेस में करेंगे, ताकि दुनिया भारत की परंपराओं से रूबरू हो सके।
अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ शुभांशु शुक्ला का तालमेल
स्पेस जैसे चुनौतीपूर्ण माहौल में काम करने के लिए शुभांशु शुक्ला ने अपनी अंतरराष्ट्रीय टीम के साथ विशेष रूप से टीमवर्क और कम्युनिकेशन पर काम किया। उन्होंने भारत के अलग-अलग हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाली वस्तुएं भी अपने साथ ISS में ले जाने की योजना बनाई, जो ISRO की मदद से चुनी गई थीं।
शुभांशु शुक्ला ने की भारत को अंतरिक्ष में गौरव से प्रस्तुत करने की तैयारी
शुभांशु शुक्ला की यह तैयारी सिर्फ एक अंतरिक्ष मिशन के लिए नहीं थी, बल्कि भारत को अंतरिक्ष में गौरव से प्रस्तुत करने की तैयारी थी। रूस से अमेरिका तक की ट्रेनिंग, भारतीय विज्ञान और संस्कृति को एक साथ लेकर चलने की सोच और मिशन के लिए की गई गहन तैयारी, उन्हें एक सच्चे भारतीय अंतरिक्ष योद्धा के रूप में स्थापित करती है।
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