महाराष्ट्र विधानसभा में अयोध्या राम मंदिर चंदा गबन को लेकर विपक्ष ने प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेता नाना पटोले ने सरकार पर सच दबाने का आरोप लगाया, वहीं सपा ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। बीजेपी ने इसे विपक्ष की साजिश करार दिया है।
मुंबई (महाराष्ट्र) [भारत], 30 जून (एएनआई): महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को विपक्षी विधायकों ने अयोध्या राम मंदिर चंदा गबन के कथित मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।

विपक्ष ने सरकार को घेरा
कांग्रेस नेता नाना पटोले ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और उनके सहयोगियों को अयोध्या जाने से रोका गया और उन्हें नजरबंद कर दिया गया। उन्होंने दावा किया कि सरकार सच को जनता तक पहुंचने से रोकने की कोशिश कर रही है। एएनआई से बात करते हुए पटोले ने कहा, "एक दिखावटी एसआईटी का गठन किया गया था। हमारे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और उनके सहयोगी, बीजेपी के 'डाकुओं' द्वारा मचाई गई तबाही की हकीकत देखने के लिए उचित अनुमति लेकर अयोध्या जाने वाले थे, लेकिन सरकार घबरा गई और उन्हें नजरबंद कर दिया। वे नहीं चाहते कि सच्चाई जनता तक पहुंचे, लेकिन जनता को हकीकत का पता चल चुका है।"
इसी बीच, फैजाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने कथित राम मंदिर चंदा गबन मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि केवल एक विशेष जांच दल (एसआईटी) पर्याप्त नहीं है। प्रसाद ने कहा, "इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित टीम द्वारा की जानी चाहिए। सबसे पहले, ट्रस्ट को निलंबित किया जाना चाहिए था और अधिकारियों को हटाया जाना चाहिए था, और फिर एसआईटी जांच की जानी चाहिए थी।" उन्होंने कहा, "बीजेपी राम मंदिर के मुद्दे पर सत्ता में आई थी और इसी मुद्दे पर उनकी सरकार जाएगी।"
बीजेपी का विपक्ष पर पलटवार
हालांकि, बीजेपी के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए उन पर भक्तों को हतोत्साहित करने की कोशिश करने का आरोप लगाया, साथ ही जनता के विश्वास और भक्ति को कमजोर करने की "साजिश" का भी आरोप लगाया। एएनआई से बात करते हुए शर्मा ने कहा, "ये (विपक्ष) वो लोग हैं जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में हिस्सा नहीं लिया। ये वही हैं जो भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते थे। इनका आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था और भक्ति से पैदा हुआ कोई योगदान नहीं था। उनका रुख सिर्फ बीजेपी के खिलाफ नहीं है; बल्कि वे राम मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या को हतोत्साहित करने के लिए ये बयान दे रहे हैं। कांग्रेस के शीर्ष नेता आज तक उस स्थान पर नहीं गए हैं। उनके मन में भक्ति की भावना को दबाने की साजिश है।"
धीरेंद्र शास्त्री ने की जांच की मांग
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि "भगवान राम के धाम" में गलत काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे और उन्होंने इस मामले में जांच एजेंसियों से जांच का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "जो लोग भगवान राम के धाम में ऐसे कृत्य करते हैं, उन्हें कठोर दंड मिलेगा। जब रावण ने माता जानकी का हरण किया, तो उसका पूरा वंश नष्ट हो गया। इसी तरह, जो कोई भी भगवान की उपस्थिति में, जो लाखों लोगों की आस्था का केंद्र हैं, ईश्वर या धर्म का कोई भय नहीं दिखाता और ऐसा घिनौना काम करता है, उसे निस्संदेह कठोर प्रतिशोध का सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने आगे कहा कि राम मंदिर की जिम्मेदारियां केवल सनातनी वैष्णव और संत परंपरा से जुड़े लोगों को ही सौंपी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, "जो व्यक्ति पूरी तरह से भगवान के प्रति समर्पित हों।" शास्त्री ने कहा, "देश में जांच एजेंसियां हैं। उन्हें मामले की जांच करनी चाहिए। प्रक्रिया अभी चल रही है।"
मामले में अब तक की कार्रवाई
सोमवार को, अयोध्या की एक स्थानीय अदालत ने कथित चंदा घोटाले के सभी आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अदालत का यह फैसला श्री राम जन्मभूमि मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं और धन तथा चढ़ावे के दुरुपयोग की रिपोर्टों पर उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा की गई एक गहन जांच के बाद आया है।
इस मामले ने उत्तर प्रदेश में एक बड़ा राजनीतिक घमासान खड़ा कर दिया है, जिसमें सत्ताधारी बीजेपी और विपक्षी दल मंदिर के वित्त के प्रबंधन को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं, जबकि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच जारी है। (एएनआई)
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