Crude Oil Import From 41 Countries: पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है. केंद्र सरकार ने संसद में बताया कि अब देश 27 की जगह 41 देशों से कच्चा तेल और 6 की जगह 15 देशों से LNG खरीदेगा. इस फैसले का मकसद किसी एक देश पर निर्भरता खत्म करना है.

India Crude Oil Imports: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर बनी अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने तेल और गैस की आपूर्ति को किसी एक देश या समुद्री मार्ग पर निर्भरता से बचाने के लिए आयात स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है। अब भारत पहले की तुलना में कहीं ज्यादा देशों से कच्चा तेल और LNG यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस खरीद रहा है। सरकार का मकसद किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश में तेल और गैस की किल्लत को रोकना है।

LNG आयात के लिए बढ़ा सप्लायर नेटवर्क

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने सोमवार को राज्यसभा में सरकार की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके मुताबिक भारत ने LNG आयात के स्रोतों में काफी विस्तार किया है। पहले देश केवल 6 देशों से LNG का आयात करता था, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 15 देशों तक पहुंच गई है। इससे किसी एक क्षेत्र में संकट आने की स्थिति में दूसरे स्रोतों से गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।

27 से बढ़कर 41 देशों से खरीदा जा रहा कच्चा तेल

भारत अपनी कच्चे तेल की कुल जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी भी आपूर्ति बाधा का सीधा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसी जोखिम को कम करने के लिए भारत ने क्रूड ऑयल के आयात स्रोत भी बढ़ाए हैं। पहले जहां भारत 27 देशों से कच्चा तेल खरीदता था, वहीं अब यह नेटवर्क बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गया है।

किसी एक देश या समुद्री रास्ते पर नहीं रहेगा दबाव

आयात स्रोतों में विविधता बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत किसी एक देश, युद्ध क्षेत्र या समुद्री व्यापार मार्ग पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहेगा। रेड सी या स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में किसी तरह की रुकावट आने पर भी वैकल्पिक स्रोतों से तेल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे वैश्विक संकट के दौरान भारत की ऊर्जा व्यवस्था को ज्यादा मजबूती मिल सकती है।

अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल से भी निपटने में मदद

कच्चे तेल की खरीद के लिए अलग-अलग देशों का विकल्प मौजूद होने से भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहतर सौदेबाजी की स्थिति मिल सकती है। अगर किसी एक क्षेत्र से सप्लाई महंगी हो जाती है, तो दूसरे देशों से खरीद का विकल्प उपलब्ध रहेगा। इससे अचानक बढ़ती वैश्विक कीमतों के असर को कुछ हद तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और घरेलू ईंधन कीमतों पर कई अन्य वैश्विक और आर्थिक कारकों का भी असर पड़ता है।

CNG, PNG और LPG की सप्लाई को मिलेगा सहारा

ऊर्जा आयात में विविधता का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहेगा। गैस की नियमित उपलब्धता से CNG और PNG जैसे ईंधनों की आपूर्ति को भी मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा रसोई गैस, बिजली उत्पादन और फर्टिलाइजर उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक गैस की सप्लाई बनाए रखने में मदद मिलेगी। इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों को भी किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट के दौरान राहत मिल सकती है।

भारत बढ़ा रहा है रणनीतिक तेल भंडार

आयात स्रोतों को बढ़ाने के साथ भारत घरेलू स्तर पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण क्षमता भी मजबूत कर रहा है। इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के तटीय क्षेत्रों में कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) क्षमता वाले तीन रणनीतिक तेल भंडार स्थापित किए हैं। इन भंडारों का इस्तेमाल आपूर्ति में गंभीर बाधा आने की स्थिति में किया जा सकता है।

6.5 MMT की अतिरिक्त रिजर्व क्षमता को मंजूरी

सरकार ने भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करने की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडुर में कुल 6.5 MMT क्षमता वाली वाणिज्यिक-सह-रणनीतिक रिजर्व सुविधाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे देश की आपातकालीन तेल भंडारण क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है।

ONGC भी बना रही है नया तेल भंडार

इसके अलावा तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ONGC) कर्नाटक में 1.75 MMT क्षमता वाली एक अलग भंडारण सुविधा विकसित कर रही है। इस सुविधा की आधी क्षमता को रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व के तौर पर सुरक्षित रखा जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार या समुद्री आपूर्ति मार्गों में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में देश को अतिरिक्त सुरक्षा देना है।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए भारत की बड़ी रणनीति

भारत की रणनीति अब केवल ज्यादा तेल और गैस खरीदने तक सीमित नहीं है। आयात के स्रोतों में विविधता, वैकल्पिक सप्लायर नेटवर्क और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार—इन तीनों पर एक साथ काम किया जा रहा है। इससे पश्चिम एशिया जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव बढ़ने या वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग बाधित होने की स्थिति में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ज्यादा मजबूती से पूरा कर सकेगा। आने वाले समय में यह रणनीति देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।