बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर को गलत बताते हुए इसे जातीय रंग देकर सीएम सम्राट चौधरी को टारगेट करने की साजिश बताया। वहीं, पीड़ित का परिवार आरोपी पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा है और अनिश्चितकालीन अनशन कर रहा है।

पटना (बिहार) [भारत], 5 जुलाई (एएनआई): बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने रविवार को एक बार फिर दोहराया कि भरत भूषण तिवारी का पुलिस एनकाउंटर "गलत" था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि इस घटना को जातीय रंग देने और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।

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यहां पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों तक पहुंचे और इस मुद्दे को सामाजिक विभाजन पैदा करने से रोके। अशोक चौधरी ने कहा, "उनका एनकाउंटर गलत था, जिसे मैं बार-बार दोहरा रहा हूं। कुछ लोग इसे जातीय रंग दे रहे हैं... कुछ लोग समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए दलित होने के नाते हम वहां जा रहे हैं... कुछ लोग जानबूझकर सम्राट चौधरी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। मंत्री होने के नाते, हमारी जिम्मेदारी है कि हम वहां जाएं और इन बातों को स्पष्ट करें।"

परिवार की मांगें और अनिश्चितकालीन अनशन

उनका यह बयान 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी के परिवार के लगातार विरोध प्रदर्शन के बीच आया है, जो 17 जून को बिहार के भोजपुर जिले में एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। शनिवार को तिवारी के परिवार ने इस घटना में कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज झूठे मामलों को वापस लेने और परिवार के लिए पर्याप्त सुरक्षा की मांग की।

परिवार के एक सदस्य ने कहा कि भरत तिवारी की मां आशा देवी अपनी मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रखेंगी। परिवार के सदस्य ने कहा, "जब तक जगदीशपुर के डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर थाना के एसएचओ राजेश कुमार मल्लकर, एसआई अंकित आर्यन और एसटीएफ जवान अक्षय कुमार की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, मेरी मां आशा देवी अपना अनिश्चितकालीन अनशन जारी रखेंगी।"

एनकाउंटर पर विवाद: आमने-सामने परिवार और पुलिस

परिवार ने तत्काल सुरक्षा की भी मांग की और अनुरोध किया कि जांच अधिकारी जांच के लिए आने से पहले उन्हें सूचित करें। उन्होंने यह भी मांग की कि पुलिस एनकाउंटर के बाद ग्रामीणों के खिलाफ कथित रूप से दर्ज मामलों को वापस ले। यह घटना एक फेसबुक लाइव वीडियो के सामने आने के बाद विवादों में घिर गई, जिसे गोलीबारी से कुछ समय पहले रिकॉर्ड किया गया था। वीडियो में तिवारी पुलिसकर्मियों की ओर अपनी पिस्तौल फेंकते हुए दिखाई दे रहे हैं।

जहां परिवार का दावा है कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया था और निहत्थे होने के बावजूद उसे गोली मार दी गई, वहीं भोजपुर पुलिस का कहना है कि उसने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की गई। तिवारी के परिवार की शिकायतों के बाद, बिहार पुलिस ने कथित गलत हत्या के संबंध में जगदीशपुर डीएसपी, शाहपुर एसएचओ और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामले की जांच जारी है। (एएनआई)

(Except for the headline, this story has not been edited by Asianetnews Editorial staff and is published from a syndicated feed.)