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Jan Gan Man Vs Vande Mataram: केंद्र ने दिल्ली HC को राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत की बराबरी को लेकर कही बड़ी बात...

दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि 'वंदे मातरम' गीत को राष्ट्रगान के समान सम्मानित और समान दर्जा दिया जाए। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गृह मंत्रालय से जवाब दाखिल करने को कहा था। जनहित याचिका सीनियर एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर किया है।

Central Government in Delhi Highcourt stated that Jan Gan Man and Vande Mataram are equal, both should be given same respect, DVG
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First Published Nov 5, 2022, 6:43 PM IST

Jan Gan Man Vs Vande Mataram: केंद्र सरकार ने साफ किया है कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' और राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' बराबर के स्तर के हैं। प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रगान व राष्ट्रगीत के प्रति समान रूप से सम्मान दिखाना होगा। केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि राष्ट्रगान का असम्मान करने पर दंडात्मक प्रावधान है लेकिन राष्ट्रगीत को लेकर ऐसा नहीं है फिर भी दोनों एक समान हैं। सरकार ने कहा कि वंदे मातरम भारतीयों की भावनाओं व मानस में एक अद्वितीय स्थान रखता है। इसको लेकर हाईकोर्ट्स व सुप्रीम कोर्ट के जो आदेश-निर्देश हैं उनका भी बराबर पालन किया जा रहा है।

क्यों केंद्र को हाईकोर्ट ने किया था तलब?

दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें यह सुनिश्चित करने की मांग की गई है कि 'वंदे मातरम' गीत को राष्ट्रगान के समान सम्मानित और समान दर्जा दिया जाए। इस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने गृह मंत्रालय से जवाब दाखिल करने को कहा था। जनहित याचिका सीनियर एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर किया है।

क्या बताया केंद्र सरकार ने? 

गृह मंत्रालय ने हलफनामा देकर बताया कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान दोनों की अपनी पवित्रता है और समान सम्मान के पात्र हैं। केंद्र ने कहा कि वर्तमान कार्यवाही की विषय वस्तु कभी भी रिट याचिका का विषय नहीं हो सकती है। जन गण मन और वंदे मातरम दोनों एक ही स्तर पर खड़े हैं और देश के प्रत्येक नागरिक को दोनों के प्रति समान सम्मान दिखाना चाहिए। राष्ट्रीय गीत भारत के लोगों की भावनाओं और मानस में एक अद्वितीय और विशेष स्थान रखता है। केंद्र सरकार की ओर से मनीष मोहन ने बात रखी। 

राष्ट्रगान के अपमान पर दंडात्मक कार्रवाई लेकिन वंदे मातरम पर नहीं

दरअसल, 1971 में राष्ट्रगान के गायन को रोकने की कार्रवाई या राष्ट्रगान के अपमान को रोकने के लिए राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम 1971 को पास किया गया था। इसके कानून के तहत राष्ट्रगान का अपमान करने वालों के खिलाफ दंडनीय अपराध का प्रावधान किया गया। जबकि राष्ट्रगीत वंदे मातरम के मामले में ऐसा कुछ नहीं है। इसको लेकर किसी प्रकार का दंडात्मक अपराध का प्रावधान नहीं है। 

क्या है याचिकाकर्ता की मांग?

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देशित करने की मांग की है कि राष्ट्रगान के समान ही राष्ट्रगीत का भी दर्जा और इसके भी अपमान पर दंड का प्रावधान हो। पेटीशनर ने कहा कि इस गीत ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। इसे संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद द्वारा 1950 में दिए गए बयान के मद्देनजर 'जन गण मन' के रूप में सम्मानित किया जाना चाहिए। देश को एकजुट रखने के लिए 'जन गण मन' और 'वंदे मातरम' के प्रचार-प्रसार के लिए राष्ट्रीय नीति बनाना सरकार का कर्तव्य है। कोई कारण नहीं है कि यह किसी अन्य भावना को जगाए क्योंकि दोनों का निर्णय संविधान निर्माताओं द्वारा किया जाता है। मांग किया है कि इसे किसी भी तरह के शो में शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि जब भी इसे गाया या बजाया जाता है तो उपस्थित सभी लोगों के लिए उचित सम्मान और सम्मान दिखाना अनिवार्य है।

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