चंडीगढ़ की अदालत ने एक ज्वेलरी फर्म के खिलाफ मामले में बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने नए कानून BNSS का हवाला देते हुए संज्ञान लेने से पहले ही आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई का मौका देने का निर्देश दिया है। मामला 5 अक्टूबर 2026 तक के लिए टल गया है।

चंडीगढ़ [भारत], 6 अगस्त (एएनआई): चंडीगढ़ की एक अदालत ने एक ज्वेलरी फर्म के खिलाफ दायर शिकायत में, मामले का संज्ञान लेने से पहले ही आरोपी व्यक्तियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के हालिया फैसलों का हवाला देते हुए सुनाया, जिसमें संज्ञान-पूर्व चरण में आरोपी को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य किया गया है। यह आदेश न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, अंबिका शर्मा ने शिकायत संख्या COMI/9/2023 की सुनवाई के दौरान पारित किया। यह मामला आरोपियों को समन जारी करने के मुद्दे पर बाकी दलीलों की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध था।

सुप्रीम कोर्ट और BNSS के नियमों का दिया हवाला

सुनवाई के दौरान, अदालत ने परविंदर सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2026 INSC 519) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ध्यान दिया। इस फैसले में कहा गया था कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 223(1) के प्रावधान के तहत, कोई भी मजिस्ट्रेट आरोपी को सुनवाई का मौका दिए बिना किसी अपराध का संज्ञान नहीं ले सकता है।

अदालत ने सिकंदर सिंह बनाम प्रवर्तन निदेशालय, गुरुग्राम (CRM-M-29954-2025) मामले में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले पर भी भरोसा किया। इस फैसले में कहा गया था कि बीएनएसएस की धारा 223 के तहत प्रक्रियात्मक सुरक्षा उन शिकायतों पर भी लागू होती है, जो बीएनएसएस के लागू होने से पहले दायर की गई थीं, बशर्ते कि संज्ञान नए कानून के लागू होने के बाद लिया जाए।

बीएनएसएस की धारा 223 के उस प्रावधान का उल्लेख करते हुए, जो किसी शिकायत का संज्ञान लेने से पहले मजिस्ट्रेट को आरोपी को सुनने की आवश्यकता बताता है, अदालत ने कहा कि यह प्रावधान प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांतों पर आधारित है।

इन न्यायिक घोषणाओं को देखते हुए, अदालत ने संज्ञान-पूर्व चरण में आरोपियों को नोटिस जारी करना उचित समझा। शिकायतकर्ता को नोटिस तामील कराने के लिए आवश्यक रजिस्टर्ड कवर और पावती (RC/AD) दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। आरोपियों पर नोटिस तामील होने के बाद आगे की कार्यवाही के लिए मामले को 5 अक्टूबर, 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। (एएनआई)

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