West Bengal Assembly: पश्चिम बंगाल का नाम जल्द ही बदल सकता है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बताया कि राज्य का नाम बदलकर 'पश्चिम बंगा' करने के लिए विधानसभा में जल्द ही एक बिल पेश किया जाएगा।

Bangla Name Proposal: पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने दावा किया है कि राज्य सरकार विधानसभा के आगामी सत्र की शुरुआत में राज्य का नाम बदलकर ‘पश्चिम बंगा’ करने से जुड़ा विधेयक पेश कर सकती है। उनके बयान के बाद एक बार फिर राज्य के नाम को लेकर सियासी बहस शुरू हो गई है।

‘पश्चिम बंगा’ नाम रखने की तैयारी?

समिक भट्टाचार्य ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि विधानसभा सत्र की शुरुआत में ही राज्य का नाम बदलने का विधेयक पेश किया जाएगा। उन्होंने हाल ही में भी संकेत दिया था कि ‘पश्चिम बांग्ला’, ‘बांग्ला’ या ‘बंगा’ जैसे नामों की जगह जल्द ही ‘पश्चिम बंगा’ नाम सामने आ सकता है।

उनके मुताबिक, प्रस्तावित नाम राज्य की ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा हुआ है। हालांकि, नाम बदलने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने के बाद केंद्र की संवैधानिक प्रक्रिया भी अहम होगी।

कई सालों से चल रही है नाम बदलने की कोशिश

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की कोशिश नई नहीं है। राज्य के नाम को लेकर पहली बड़ी पहल 1999 में हुई थी। उस समय वाम मोर्चे की सरकार ने ‘पश्चिम बंगा’ नाम का सुझाव दिया था। बाद में ‘बांग्ला’ नाम पर भी चर्चा हुई, लेकिन केंद्र से इसे मंजूरी नहीं मिली।

2011 के बाद फिर तेज हुई थी कोशिश

2011 में तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी राज्य का नाम बदलने का प्रयास किया गया। उस दौरान ‘पश्चिम बंगा’ नाम को लेकर प्रस्ताव सामने आया, लेकिन तत्कालीन केंद्र सरकार से इसे मंजूरी नहीं मिल सकी।

इसके बाद 2016 में राज्य सरकार ने ‘बांग्ला’ नाम रखने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया। 2018 में विधानसभा ने भी ‘बांग्ला’ नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र के पास भेजा था। हालांकि, इस प्रस्ताव को भी केंद्र की मंजूरी नहीं मिली।

अब क्या बदलेगा?

अब ‘पश्चिम बंगा’ नाम को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के ताजा दावे ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। अगर विधानसभा में विधेयक पेश होता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है, तो राज्य के आधिकारिक नाम में बदलाव का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि प्रस्ताव कब पेश होता है और केंद्र की ओर से इस पर क्या रुख अपनाया जाता है।