1 साल पहले आज ही के दिन यानी 22 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान 2 मिशन की लॉन्चिंग की थी। इस मिशन ने पूरे देश को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन 7 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग से पहरले लैंडर विक्रम का संपर्क टूट गया था।

नई दिल्ली. 1 साल पहले आज ही के दिन यानी 22 जुलाई को इसरो ने चंद्रयान 2 मिशन की लॉन्चिंग की थी। इस मिशन ने पूरे देश को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन 7 सितंबर को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग से पहरले लैंडर विक्रम का संपर्क टूट गया था। भारत इतिहास रचने से सिर्फ 69 सेकंड पीछे रह गया था। लैंडर चंद्रमा की सतह से सिर्फ 2 किमी दूर था। 

Add Asianetnews Hindi as a Preferred SourcegooglePreferred

आज चंद्रयान 2 की लॉन्चिंग को 1 साल पूरा हो गया है। ऐसे में इसरो अध्यक्ष डॉ. के. सिवन ने बताया कि मिशन अब तक कितना सफल हुआ है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया, चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने चांद के 60% ध्रुवीय क्षेत्र को कवर कर लिया है। इससे मिल रहे डेटा के आधार पर एक साल में इसरो यह अनुमान लगा लेना की चंद्रमा पर कितना पानी है। 

अभी तक कितनी मिली सफलता
रिपोर्ट के मुताबिक, सिवन ने बताया, भारत ने इस मिशन के जरिए चंद्रयान-2 में डुअल फ्रीक्वेंसिंग बैंड पॉलरिमेट्रिक राडार चंद्रमा पर भेजा था। यह सतह से चार मीटर गहराई तक डेटा हासिल कर सकता है। दुनिया में यह पहली बार हुआ है। इशके अलावा, ऑर्बिटर कई सालों तक काम करेगा। इसमें लगे 8 उपकरण बेहतर काम कर रहे हैं। चंद्रमा की सतह के एलीवेशन मॉडल का मिनरल मैपिंग के जरिए काम चल रहा है। क्सरे स्पेक्ट्रोमीटर के जरिए एल्युमिनियम और कैल्शियम के स्पेक्ट्रल सिग्नेचर भेजे गए हैं।

जल्द ही भारत यह पता लगाने में कामयाब हो जाएगा कि चंद्रमा पर मिनरल कितनी मात्रा में उपलब्ध है। 

अब आगे क्या?
सिवन ने बताया, गगनयान की डिजाइन का काम पूरा हो चुका है। हालांकि, लॉकडाउन के चलते काम धीमा हुआ है। हालांकि, गगनयान हमारी प्राथमिकता है। हम उद्योगों के शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, उम्मीद है कि गगनयान के फाइनल फ्लाइट के लक्ष्य को अगस्त 2022 से पहले हासिल कर लेंगे।