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उद्धव के मुख्यमंत्री पद से खतरा टला, 21 मई को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ होगा MLC चुनाव

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सीएम की कुर्सी को लेकर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश पर चुनाव आयोग ने एमएलसी चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अब 21 मई को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ एमएलसी का चुनाव होगा। 

cm Uddhav Thackeray met Governor Bhagat Singh Koshyari on Maharashtra Day KPP
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Mumbai, First Published May 1, 2020, 10:28 AM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की सीएम की कुर्सी को लेकर मंडरा रहा खतरा अब टल गया है। राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी की सिफारिश पर चुनाव आयोग ने एमएलसी चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। अब 21 मई को सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों के साथ एमएलसी का चुनाव होगा। 

इससे पहले सीएम ठाकरे शुक्रवार सुबह राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात करने पहुंचे। हालांकि, इस मुलाकात को महाराष्ट्र दिवस पर शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है। राज्यपाल से ठाकरे की मुलाकात करीब 20 मिनट तक चली। 

अभी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं ठाकरे
उद्धव ठाकरे को जब विधायक दल का नेता चुना गया था और उन्होंने 28 नवंबर को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तब वे विधान परिषद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री की शपथ लेने के 6 महीने बाद विधान परिषद या विधानसभा में किसी एक का सदस्य बनना था। लेकिन कोरोना वायरस के चलते विधान परिषद में चुनाव नहीं हो पाया। ऐसे में अब उद्धव ठाकरे का मुख्यमंत्री पद राज्यपाल के हाथ में था। 

राज्यपाल ने विधान परिषद की सीटों पर चुनाव कराने की मांग की 
इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ठाकरे की सिफारिश पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने चुनाव आयोग से विधान परिषद की रिक्त पड़ीं 9 सीटों पर चुनाव कराने का अनुरोध किया। राजभवन से गुरुवार को जारी पत्र में कहा गया है कि विधान परिषद सीटों के लिए खास दिशानिर्देशों पर चुनाव हो सकता है। इसे चुनाव आयोग ने मान लिया।
 
उद्धव ने की पीएम मोदी से अपील
इससे पहले उद्धव ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में बात की थी। उन्होंने फोन पर बताया था कि राज्य में राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। ठाकरे ने बताया था कि उन्होंने राज्यपाल को दो बार सिफारिश की कि उन्हें राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद भेजा जाए, लेकिन अभी तक इस मामले में उत्तर नहीं मिला। हालांकि, पीएम मोदी ने इस मामले में उन्हें मदद का आश्वासन दिया था।

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