कॉटन यूनिवर्सिटी और आरण्यक ने जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में अकादमिक और अनुसंधान सहयोग के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए। पांच साल की यह साझेदारी संयुक्त अनुसंधान, इंटर्नशिप और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देगी।
गुवाहाटी (असम) [भारत], 27 जुलाई (एएनआई): कॉटन यूनिवर्सिटी (सीयू) ने सोमवार को आरण्यक के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय शासन, आपदा जोखिम में कमी और सतत विकास पर केंद्रित शैक्षणिक और अनुसंधान पहलों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस एमओयू पर कॉटन यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. हिरेन डेका और आरण्यक के महासचिव डॉ. बिभब कुमार तालुकदार ने कॉटन यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. रमेश चंद्र डेका की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। यह पांच साल की साझेदारी संयुक्त अनुसंधान, छात्र इंटर्नशिप, फैकल्टी और शोधकर्ता विनिमय, क्षमता-निर्माण कार्यक्रम, सहयोगी प्रकाशन, और सेमिनार व कार्यशालाओं के माध्यम से ज्ञान-साझाकरण को बढ़ावा देगी।
एमओयू पर हस्ताक्षर के दौरान अनुसंधान और विकास के डीन प्रो. शांतनु सरमा, छात्र कल्याण के डीन प्रो. ईशान कलिता, पर्यावरण जीव विज्ञान और वन्यजीव विज्ञान विभाग के डॉ. नारायण शर्मा के साथ आरण्यक के दो वरिष्ठ वैज्ञानिक और निदेशक डॉ. पार्थ ज्योति दास और उदयन बोरठाकुर भी मौजूद थे। प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि यह सहयोग समाज और क्षेत्र के लाभ के लिए अंतःविषय अनुसंधान, पर्यावरण प्रबंधन और सार्थक शैक्षणिक जुड़ाव को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
छात्रों और शोधकर्ताओं को मिलेगा लाभ
इस ऐतिहासिक विकास पर प्रतिक्रिया देते हुए, आरण्यक के महासचिव डॉ. बिभब कुमार तालुकदार ने कहा, "आरण्यक की ओर से, मैं कॉटन यूनिवर्सिटी के माननीय कुलपति और उनकी टीम के सदस्यों का इस एमओयू को हकीकत में बदलने के लिए अपना हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं। यह वास्तव में हमें व्यावहारिक अनुसंधान और संरक्षण के विविध क्षेत्र में एक साथ काम करने का एक शानदार अवसर प्रदान करेगा जिससे छात्रों और शोधकर्ताओं को लाभ होगा।" (एएनआई)
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