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Rezang La war memorial: 1962 की लड़ाई के यौद्धा को व्हीलचेयर पर लेकर पहुंचे रक्षामंत्री-'यह मेरा सौभाग्य है'

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) 18 नवंबर को लद्दाख में थे। वे यहां 1962 की लड़ाई और गलवान घाटी में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को सम्मान देने के लिए रेजांग ला युद्ध स्मारक (Rezang La war memorial) का उद्घाटन करने आए थे।

Defense Minister visit Rezang La  War Memorial to pay tributes to brave Indian soldiers KPA
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Ladakh, First Published Nov 18, 2021, 9:40 AM IST
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नई दिल्ली. रक्षामंत्री राजनाथ सिंह(Rajnath Singh) ने आज (18 नवंबर) पूर्वी लद्दाख के रेजांग ला स्थित युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। 1962 की लड़ाई और गलवान घाटी में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों को सम्मान देने के लिए रेजांग ला युद्ध स्मारक (Rezang La war memorial) बनाया गया है। इस मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (Gen Bipin Rawat) भी मौजूद थे। लद्दाख निकलने से पहले राजनाथ सिंह ने यह tweet किया था-'मैं उन बहादुर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए रेजांग ला का दौरा करूंगा, जिन्होंने 1962 में वहां एक वीरतापूर्ण लड़ाई लड़ी और उन्हें एक नया युद्ध स्मारक समर्पित किया।' 

इस मौके पर रक्षामंत्री ने 1962 की लड़ाई के वीर यौद्धा की व्हील चेयर खुद संभाली। राजनाथ सिंह ने कहा-मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे रेज़ांग ला की लड़ाई में बहादुरी से लड़े ब्रिगेडियर (रिटा.) आरवी जटार से भेंट करने का अवसर मिला। वे उस समय कम्पनी कमांडर थे। उनके प्रति सम्मान के भाव से मैं अभिभूत हूं और उनके साहस को मैं नमन करता हूं। ईश्वर उन्हें स्वस्थ रखे और दीर्घायु करें।

रेजांग ला में राजनाथ सिंह ने किया tweet
आज लद्दाख़ की दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित रेजांग ला पहुंच कर 1962 की लड़ाई में जिन 114 भारतीय सैनिकों ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था, उन बहादुर सैनिकों की स्मृतियों को नमन किया। रेज़ांग ला का युद्ध, विश्व की दस सबसे महान और चुनौतीपूर्ण सैन्य संघर्षों में से एक माना जाता है। रेज़ांग ला का ऐतिहासिक युद्ध 18,000 फीट की ऊंचाई पर जिन विषम परिस्थितियों में लड़ा गया, उसकी कल्पना करना भी आज मुश्किल है। मेज़र शैतान सिंह तथा उनके साथी सैनिक ‘आखिरी गोली और आखिरी सांस’ तक लड़े एवं बहादुरी और बलिदान का नया अध्याय लिखा। इस लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों की स्मृति में आज एक नया युद्ध स्मारक समर्पित किया गया। यह स्मारक  सेना द्वारा  रेज़ांग ला में प्रदर्शित उस दृढ़ संकल्प और अदम्य साहस की मिसाल है, जो केवल इतिहास के पन्नो में ही अमर नहीं है, बल्कि हमारे दिलों में भी धड़कता है। भारत का चरित्र रहा है कि हमने किसी भी दूसरे देश की ज़मीन पर क़ब्ज़ा करने की नीयत नहीं रखी। मगर यदि किसी भी देश ने भारत की ओर आँख उठा कर भी देखा है तो हमने उसे मुँहतोड़ जवाब दिया है। हमारी सेना के बहादुर जवान भारत की हर एक इंच ज़मीन की रक्षा करने में सक्षम हैं।

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चीन के साथ हुआ था 1962 में युद्ध
'हिंदी-चीनी भाई-भाई' करते हुए 1962 में भारत पर हमला करने वाले चीन को भारतीय सैनिकों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था। इसी रेजांग ला लड़ाई को 59 साल पूरे हुए हैं। रेजांग ला के युद्ध में भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट(13 कुमाऊं) ने चीनी सैनिकों के हौसले पस्त कर दिए थे। रेजांग ला स्मारक पिछले साल 2020 में गलवान हिंसा में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की भी याद में बनाया गया है। स्मारक पर गलवान हिंसा में शहीद भारतीय सैनिकों के भी नाम लिखे गए हैं।

रेजांग लड़ाई के बारे में यह भी जानें
18 हजार फीट की ऊंचाई पर रेजांग ला में 1962 में हुए जंग में चीन के 1310 सौनिकों की जान गई थी। 13 कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों से उनका सामना हुआ था। भारत के 120 में से 114 जवान इस लड़ाई में शहीद हुए थे। लड़ाई शुन्य से कम तापमान में लड़ी गई थी। अदम्य साहस और वीरता के लिए मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार पहले का स्मारक छोटा था। इसका निर्माण 1963 में किया गया था। अब स्मारक का विस्तार किया गया है। स्मारक में मेजर शैतान सिंह सभागार और रेजांग ला फोटो गैलरी है। इसके साथ ही गलवान घाटी में शहीद हुए 20 जवानों के नाम भी लिखे गए हैं। अब यह लद्दाख के पर्यटन मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।  सूत्रों के अनुसार अगले सीजन से चुशुल, रेजांग ला, डेमचोक और अग्रिम इलाकों के अन्य हिस्सों के गेट पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे।

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