Delhi Pollution: दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर की हवा पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा खराब हो गई है। ग्रीन पटाखों के दावों के बावजूद प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ गया। पराली जलाने की घटनाएं कम होने के बाद भी हवा जहरीली बनी हुई है।

Delhi Pollution: दिल्ली-एनसीआर को इस बार दिवाली पर प्रदूषण से बचाने के लिए सिर्फ ग्रीन पटाखे बेचने का दावा किया गया था, लेकिन हकीकत में ग्रीन पटाखों के नाम पर जो पटाखे बेचे और चलाए गए, उन्होंने जमकर प्रदूषण फैला। दीवाली के दूसरे दिन लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दिवाली के बाद दिल्ली की हवा की गुणवत्ता पिछले 5 सालों में सबसे खराब दर्ज की गई। मंगलवार सुबह PM 2.5 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर पहुंच गया, जो WHO की तय सीमा से करीब 100 गुना ज्यादा है।

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ग्रीन पटाखों से 30 से 50 प्रतिशत तक कम होता है वायु प्रदूषण 

आमतौर पर सर्दियों में पराली जलाना दिल्ली के प्रदूषण की बड़ी वजह माना जाता है। नीरी के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. आर.जे. करुपदम ने कहा कि अगर सच में ग्रीन पटाखे चलाए गए होते, तो हवा में कुछ सुधार जरूर दिखता। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्रीन पटाखों से आम पटाखों की तुलना में 30 से 50 प्रतिशत तक वायु प्रदूषण कम होता है। हालांकि, ग्रीन पटाखे कोई नई चीज नहीं हैं। इन पर कई सालों से काम हो रहा है। नीरी उन पटाखा कंपनियों को लाइसेंस देने से पहले उनके बनाए ग्रीन पटाखों का परीक्षण करता है। लेकिन यह जांच सिर्फ लाइसेंस मिलने के समय ही होती है। बाद में कंपनियां वास्तव में ग्रीन पटाखे बना रही हैं या नहीं, इसकी निगरानी पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन करती है।

1,403 पटाखा कंपनियों के पास है ग्रीन पटाखे बनाने की तकनीक

नीरी ने अब तक देशभर की 1,403 पटाखा कंपनियों को ग्रीन पटाखे बनाने की तकनीक सौंपी है और उन्हें इसका प्रशिक्षण भी दिया गया है। इनमें से करीब 125 कंपनियां दिल्ली-एनसीआर में हैं। हालांकि, जांच के दौरान लगभग 25% कंपनियों के पटाखे खराब गुणवत्ता वाले पाए गए, जिसके कारण उनके आवेदन रद्द कर दिए गए। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कुल वायु प्रदूषण में पटाखों की हिस्सेदारी कितनी है।

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इस बार दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित

क्लाइमेट ट्रेंड्स के विशेषज्ञों ने दिवाली से पहले, दिवाली के दिन और उसके अगले दिन की हवा में मौजूद PM 2.5 के आंकड़ों का अध्ययन किया। उन्होंने 2021 से 2025 तक की सभी दीवाली के आंकड़ों की तुलना की, जिससे साफ हुआ कि इस बार दिल्ली की हवा सबसे ज्यादा प्रदूषित रही। रिपोर्ट में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े लिए गए।

दिवाली से एक दिन पहले दिल्ली की हवा में PM 2.5 का स्तर 156.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था।

दिवाली वाले दिन यह बढ़कर 233.5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर हो गया।

और दिवाली के अगले दिन यह खतरनाक स्तर तक पहुंच गया — 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर।