दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी के एक चर्च पर हुए हमले के वीडियो को फेक बताया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस ने एक वायरल वीडियो में किए गए उन दावों को बुधवार को खारिज कर दिया कि एक चर्च पर हमला किया गया। 

नई दिल्ली(New Delhi). दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी के एक चर्च पर हुए हमले के वीडियो को फेक बताया है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। दिल्ली पुलिस ने एक वायरल वीडियो में किए गए उन दावों को बुधवार को खारिज कर दिया कि एक चर्च पर हमला किया गया और इस संदेह पर जबरन वहां से उसे ढहा दिया गया कि वहां धर्मांतरण(religious conversion) हो रहा था। पढ़िए पूरा मामला...

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यह कहा दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस के डिप्टी कमिश्नर (उत्तर) सागर सिंह कलसी ने कहा, "वहां कोई चर्च नहीं था। न ही वहां से किसी को जबरन हटाया गया।" पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित वीडियो में दिख रही इमारत चर्च नहीं, बल्कि शहर के उत्तरी हिस्से में एक निजी इमारत है। पुलिस के मुताबिक, 11 दिसंबर की सुबह पीसीआर को बुराड़ी की बाबा कॉलोनी स्थित बिल्डिंग में लोगों के इकट्ठा होने की कॉल आई थी। वहां धर्म परिवर्तन को लेकर भी शक जताया गया था। (File Photo)

बिल्डिंग के ग्राउंड हॉल को एक ईसाई महिला को किराए पर दिया गया था। पुलिस के मुताबिक, इसका इस्तेमाल सभाओं और 10:30 से 12:30 बजे के बीच कैरल गाने के लिए किया जाता था। पूछताछ में वहां 70-80 लोगों के जमा होने की बात सामने आई थी।

पुलिस ने जांच के बाद कहा-"वहां से किसी भी किरायेदार को बेदखल नहीं किया गया है। कोई बर्बरता, चोरी, दवाओं के जरिये बरगलाना या कोई गलत व्यवहार नहीं हुआ। सिर्फ मकान मालिक के अनुरोध पर किरायेदार ने वहां अव्यस्थित रखीं 10 कुर्सियों और एक लाउडस्पीकर हटाया था।"

पुलिस के अनुसार फेक वीडियो के बाद स्थानीय निवासी इमारत के बाहर जमा हो गए और धर्मांतरण के संदेह में विरोध प्रदर्शन किया। मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें एक व्यक्ति ने दावा किया कि बुराड़ी इलाके में एक चर्च पर 400 लोगों ने हमला किया था।

उसने अपने ट्वीट में लिखा, "दिल्ली बुराड़ी में एक चर्च पर आज सुबह लगभग 400 लोगों ने हमला किया। उन्होंने चर्च को जबरन खाली कर दिया और उन्हें धमकाया।"

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने कहा कि उन्होंने तथ्यों को स्पष्ट किया है और ट्विटर अकाउंट धारक से इसे हटाने को कहा है, क्योंकि यह तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। वीडियो में लोगों के एक समूह को 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए देखा जा सकता है। 

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